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मिलिए कोयले के इन गरीब तस्करों से

दस किलो की साइकिल पर 150 किलो कोयला

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Jeetendra kumar singh

Apr 10, 2015

Coal Smuggling

Coal Smuggling

रांची-पटना हाइवे पर कुजू के पास है गांव सोनडिहा चैनपुर। यहीं पर रहते हैं कुरथी महतो। 58 साल के कुरथी को एक बार टीबी हो चुकी है। गिधनी (बोकारो) की एक बंद पड़ी खदान से कोयला खरीदना, उसे साइकिल से रांची ले जाकर बेचना इनका पेशा है। इसमें उन्हें हाड़तोड़ मेहनत करनी पड़ती है।

कोयला तस्कर
दस किलो की साइकिल पर 150 किलो कोयला। इस साइकिल के साथ करीब 60 किलोमीटर का रास्ता। यह दूरी पैदल तय करने के बावजूद कुरथी 29 मार्च को खुश थे। उन्होंने हड़िया पी, पोते-पोतियों के लिए पेप्सी की एक लीटर वाली बोतल खरीदी। उस रात उनके घर में मुर्गा-भात बना। आप जानना चाहेंगे कुरथी के इत्मीनान और बच्चों के इस ट्रीट की वजह। कुरथी ने तीन दिन, दो रात सड़क पर गुजारने के बाद उस दिन रांची के पंडरा में कोयले को बेचा।

इससे उन्हें 1300 रुपये मिले। यह कोयला उन्होंने गिधनी से सिर्फ 250 रुपये में खरीदा था। मतलब, 1050 रुपये का मुनाफा। खुशी की वजह यही कमाई है। कुरथी का सोनडिहा चैनपुर में कच्चा, खपरैल का मकान है। इस घर के अपने हिस्से वाले इकलौते कमरे में वह अपनी पत्नी शनिचरी के साथ रहते हैं।

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