
Dhar bhojshalaMP Highcourt Judge on inspection
Dhar Bhojshala: मध्य प्रदेश के धार जिले से बड़ी खबर आई है। पिछले दिनों से लगातार आ रही भोजशाला में हाई कोर्ट के निरीक्षण की खबरों के बीच शनिवार दोपहर को जज मौके पर पहुंच गए। बता दें कि हाईकोर्ट जज के इस दौरे को गुप्त रखा गया। हाईकोर्ट का यह दौरा हिंदू-मुस्लिम विवाद में फंसी भोजशाला के लिए अहम साबित होगा। बताया जा रहा है कि उनके साथ ASI टीम भी वहां पहुंची है। जो ASI सर्वे रिपोर्ट की तस्दीक करेंगे। ऐसे में हाईकोर्ट को यह दौरा अहम माना जा रहा है।
बता दें कि एमपी हाई कोर्ट का यह दौरा 24 मार्च को तय किया गया था। लेकिन कुछ कारणों से यह एक दिन टल गया। लेकिन फिर खबर आई कि यह दौरा 25 मार्च को किया जाएगा। दिनभर इंतजार के बाद भी यहां इस दिन भी हाईकोर्ट का निरीक्षण नजर नहीं आया।
न्यायमूर्ति दोपहर 1:52 बजे सीधे भोजशाला परिसर पहुंचे। उनके साथ जिला कलेक्टर प्रियंक मिश्रा और पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी भी मौजूद रहे। सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के बीच न्यायमूर्ति ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन इस ऐतिहासिक इमारत के चप्पे-चप्पे को देखकर और वहां की वास्तुकला व इतिहास के बारे में जानकारी ले रहे है।
निरीक्षण के दौरान न्यायमूर्ति ने भोजशाला के विभिन्न हिस्सों, स्तंभों और वहां मौजूद शिलालेखों का अवलोकन करेंगे। बताया जा रहा है कि इस दौरे का मुख्य उद्देश्य परिसर की वर्तमान स्थिति को समझना और ऐतिहासिक तथ्यों का प्रत्यक्ष मुआयना करना है। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें परिसर की व्यवस्थाओं और एएसआई द्वारा किए जा रहे कार्यों से अवगत कराया।
बता दें कि हाईकोर्ट के दो जज जहां भोजशाला परिसर का निरीक्षण कर रहे हैं। वहीं भोजशाला के बाहर सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल तैनात है।
संभावना जताई जा रही है कि हाईकोर्ट के जज भोजशाला से निरीक्षण के बाद धार किला में म्यूजियम का दौरा भी कर सकते हैं। बताया जा रहा है कि ASI ने सर्वे रिपोर्ट में जो चीजें और स्तंभ, सिक्के, मूर्तियां आदि वहां से मिले हैं, उनमें कई प्रमाण भोजशाला किले के म्यूजियम में भी रखे गए हैं। इसीलिए माना जा रहा है कि जज वहां भी जा सकते हैं।
भोजशाला को लेकर चल रहे कानूनी विवाद और वैज्ञानिक सर्वेक्षण की मांगों के बीच इस उच्च स्तरीय दौरे से अब सबकी निगाहें 2 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।
बता दें कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने 22 मार्च 2024 से जांच, सर्वेक्षण और उत्खनन शुरू किया गया था। ये करीब 100 दिन चला। सर्वे टीम में पुरातत्वविद्, अभिलेखविद् (एपिग्राफिस्ट), रसायनविद्, संरक्षक, सर्वेक्षक, फोटोग्राफर, ड्राफ्ट्समैन और अन्य अधिकारी शामिल थे।
इस दौरान टीम को भोजशाला परिसर में 12वीं से 20वीं सदी तक के शिलालेखों के प्रमाण मिले, संस्कृत-प्राकृत के साथ अरबी-फारसी लेख भी मिले। जांच के दौरान 13वीं सदी के आसपास के करीब 50 शिलालेखों के टूटे टुकड़े मिले। साथ ही एक प्रतिमा के आधार का टूटा हिस्सा मिला। इसके साथ ही कई पत्थर की पट्टिकाएं ऐसी मिली जिन पर लिखावट जानबूझकर मिटाई गई थी और बाद में इन्हें निर्माण कार्य में इस्तेमाल कर लिया गया। यही नहीं टीम को यहां से संरचना के अलग-अलग हिस्सों में 16वीं से 20वीं सदी के बीच के 43 लेख मिले हैं, जो स्याही से लिखे गए हैं। इनमें धार्मिक पाठ, साहित्यिक रचनाओं के अलावा यहां आने वाले लोगों के नाम भी दर्ज हैं। कुछ शिलालेखों में काजी जलालुद्दीन, अजीजुद्दीन, सैयद अनवर और कलंदर बैग जैसे आगंतुकों के नाम भी लिखे हैं। एक लेख में यह भी उल्लेख है कि 1905 में ग्वालियर राज्य के उप-इंजीनियर सैयद हुसैन भी यहां आ चुके थे।
Updated on:
28 Mar 2026, 3:47 PM IST
Published on:
28 Mar 2026, 3:22 PM IST
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