
Due to the absence of publicity, the custom hiring scheme, the farmers are deprived of benefits, the wasteful tools at the centers
अतुल पोरवाल@धार.
कोई 15 बरस से सरकार ने कस्टम हायरिंग योजना चला रखी है, लेकिन अधिकांश किसानों को अब तक इसके बारे में जानकारी नहीं है। प्रचार प्रसार के अभाव में यह योजना दम तोड़ती दिखाई दे रही है। योजना के तहत जिले में सहकारिता विभाग के 14 सेंटर स्थापित हैं, जहां से किसानों को रियायती किराए पर ट्रेक्टर व अन्य उपकरण दिए जाते हैं। सरकार द्वारा उपलब्ध हैवी ड्यूटी ट्र्रेक्टर के अलावा उम्दा किस्म के उपकरणों से खेतों की अच्छी जुताई व फसल तैयार की जा सकती है, लेकिन जानकारी के अभाव में ये उपकरण रखे-रखे ही खराब हो रहे हैं। इधर बाजार से महंगे किराए पर उपकरण लेने से खेती की लागत बढ़ रही है।
हर सेंटर पर उपलब्ध हैं ये उपकरण
सोसाटियों के माध्यम से किसानों को रियायती किराए पर उपलब्ध कराए जाने वाले उपकरणों में ट्रेक्टर, रोटावेटर, रिवॢसबल प्लाऊ, कल्टीवेटर, हैरो, सीड कम फर्टीलाइजर ड्रिल, रेज्ड बेड प्लांटर व मल्टी क्राप थ्रेशर शामिल है। सभी १४ सेंटर पर ये सभी उपकरण उपलब्ध हैं, जो बाजार से काफी कम किराए पर किसानों की सहूलियत के लिए रखे गए हैं। इसके अलावा कृषि विभाग द्वारा भी कुछ सेंटर संचालित हैं, जबकि विभाग से पंजीयन करवाकर कुछ निजी सेंटर भी काम कर रहे हैं।
ये है अंतर
उपकरण बाजार किराया सरकारी किराया
ट्रेक्टर 700 रुपए प्रति घंटा 500 रुपए प्रति घंटा
रोटावेटर 1000 रुपए प्रति घंटा 550 रुपए प्रति घंटा
प्लाऊ 700 रुपए प्रति घंटा 500 रुपए प्रति घंटा
थ्रेशर 700 रुपए प्रति घंटा 500 रुपए प्रति घंटा
नोट-सरकारी किराए में ईंधन व ड्रायवर का खर्च शामिल है, लेकिन सेंटर से खेत की दूरी का 15 रुपए प्रति किलोमीटर अलग से चार्ज देना होता है।
जिले में यहां है सेंटर
को-ऑपरेटिव इंस्पेक्टर विकास खराड़े के अनुसार तिरला, कैसूर, सागौर, गाजनोद, जीराबाद, गंधवानी, सिंघाना, डही, कुक्षी, निसरपुर, अजंदा, खलघाट, गुजरी व गिरवानिया में कस्टम हायरिंग सेंटर्स है। यहां से क्षेत्र के किसान रियायती किराए पर ट्रेक्टर व उपकरण ले सकते हैं। इधर प्रभारी राजेश बर्मन के अनुसार कृषि विभाग द्वारा संचालित करीब 18 कस्टम हायरिंग सेंटर्स में संचालित हो रहे हैं।
हमें तो पता ही नहीं
सरकार की ऐसी कोई योजना भी है। हमें तो आज तक जानकारी नहीं। वर्षों से महंगे किराए पर खेत जुतवा रहे हैं।
-नरेंद्र यादव, किसान
ऐेसे ही बंद हो जाती है योजनाएं
हमें क्या पता कि सरकार ने किराए पर देने के लिए खेतीहर उपकरणों के सेंटर बना रखे हैं। किसानों के लिए सरकार ने कई योजनाएं चला रखी हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में इनका लाभ नहीं मिल रहा और कई योजनाएं तो अच्छा प्रतिसाद नहीं मिलने का बहाना गढक़र बंद कर दी जाती है।
-अनिल कामदार, किसान
और प्रचार की जरूरत
वैसे तो किसानों को इस योजना की जानकारी है, लेकिन अभी इसे और प्रचार की जरूरत है। कुछ और नए उपकरण खरीदने के लिए शासन स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।
-डीके नागेंद्र, अपर कलेक्टर, धार
Published on:
11 Mar 2018 02:45 pm
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