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धार की स्लम बस्तियों में पीने लायक नहीं पानी

धार. इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से 28 लोगों की मौत के बाद जहां प्रशासन पेयजल की गुणवत्ता को लेकर सतर्कता का दावा कर रहा है, वहीं धार नगर पालिका क्षेत्र की स्लम बस्तियों में लापरवाही की गंभीर तस्वीर सामने आई है। अमृत 2.0 योजना के तहत की गई पेयजल सैम्पलिंग में शहर की […]

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धार

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Sachin Trivedi

Jan 28, 2026

रिपोर्ट बनी लेकिन 8 माह से विभाग तक नहीं पहुंची

रिपोर्ट बनी लेकिन 8 माह से विभाग तक नहीं पहुंची

धार. इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से 28 लोगों की मौत के बाद जहां प्रशासन पेयजल की गुणवत्ता को लेकर सतर्कता का दावा कर रहा है, वहीं धार नगर पालिका क्षेत्र की स्लम बस्तियों में लापरवाही की गंभीर तस्वीर सामने आई है। अमृत 2.0 योजना के तहत की गई पेयजल सैम्पलिंग में शहर की कई स्लम बस्तियों में पानी पीने योग्य नहीं पाया गया, बावजूद इसके सुधार के लिए न तो रिपोर्ट संबंधित शाखा तक पहुंची और न ही कोई ठोस कार्रवाई की गई। मायापुरी, ब्रह्माकुंडी, अर्जुन कॉलोनी सहित कई स्लम एरियों में नलों से लिए गए पानी की जांच में पीएच मान 10 से 13 तक पाया गया है, जबकि टीडीएस भी साढ़े 300 से साढ़े 500 के बीच दर्ज हुआ। यह दोनों ही मानक शासन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से कहीं अधिक हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह का पानी लंबे समय तक पीने से पाचन तंत्र सहित अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि यह सैम्पलिंग मई-जून 2025 में की गई थी, लेकिन इसकी रिपोर्ट आज तक नगर पालिका की जल शाखा में नहीं सौंपी गई।

स्वसहायता समूहों ने की जांच, विभाग तक नहीं पहुंची रिपोर्ट

नगर पालिका ने अमृत 2.0 योजना के तहत जल प्रहरी नियुक्त किए हैं, जिनकी जिम्मेदारी स्वसहायता समूह की महिलाओं को सौंपी गई है। इन्हें जल परीक्षण किट उपलब्ध कराई गई और प्रशिक्षण भी दिया गया। सहज और दृष्टि स्वसहायता समूह की महिलाओं ने अब तक शहर के करीब 2 हजार नलों से पानी के सैम्पल लेकर जांच की है। प्रति सैम्पल 48 रुपए का भुगतान किया जा रहा है, लेकिन बीते आठ महीनों से यह पूरी रिपोर्ट नगर पालिका की जल शाखा तक नहीं पहुंच पाई। इस स्थिति ने पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि जांच हो रही है, लेकिन नतीजों पर कार्रवाई नहीं हो रही, तो सैम्पलिंग का औचित्य ही सवालों के घेरे में है

टेस्टिंग प्रक्रिया पर भी सवाल, जिला लैब ने जताई आपत्ति

स्लम बस्तियों में अत्यधिक पीएच मान सामने आने के बाद टेस्टिंग प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लग गए हैं। जिला जल प्रयोगशाला के सीनियर केमिस्ट पवित्रम ने इतना अधिक पीएच मान आने की संभावना पर ही सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पीएच का मान 10 से 13 होना सामान्य स्थिति में संभव नहीं है और इसमें टेस्टिंग की कसावट व निगरानी जरूरी है। मानकों के अनुसार पेयजल का पीएच 6.5 से 8.5 और टीडीएस 100 से 300 एमजी के बीच होना चाहिए। रिपोर्ट में जहां पीएच अत्यधिक है, वहीं टीडीएस भी कई क्षेत्रों में मानक से अधिक पाया गया है। इन हालात में पानी को सुरक्षित नहीं माना जा सकता।