
,,
धार जिले का कारण डैम फूटने की घटना को शायद ही कोई भूला होगा. इस घटना को एक साल पूरा हो रहा है। अगस्त माह में ही यह डैम फूट गया था और इसकी तबाही में कई गांवों को नुकसान उठाना पड़ा था। भ्रष्टाचार के आरोप लगे, जांच भी हो रही है। लेकिन बंध फूटने का कारण अब तक नहीं पता चल पाया है। इस बांध को बनाने का पूरा पैसा पानी में बह गया।
मिट्टी की पाल से रिसाव शुरू हो गया था
कारम डेम निर्माण के लिए 304 करोड़ रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति मिली थीं। करोड़ों रुपए खर्च कर डेम जब बना था, तो पानी भराव का सही आंकलन अधिकारी नहीं हो पाया और अधिक मात्रा में पानी भरने से मिट्टी की पाल से रिसाव शुरू हो गया था। जिसके चलते धरमपुरी और महेश्वर तहसील के दर्जनभर से अधिक गांव और वहां रहने वाले हजारों ग्रामीणों की जान पर आफत बन आई थीं।
36 महीने में होना था पूर्ण
जलसंसाधन विभाग द्वारा मध्य सिंचाई परियोजना के उद्देश्य से कारम डेम का निर्माण 10 अगस्त 2018 में आरंभ किया था। जिसे 36 महीने में पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन डेम पूरा होता, उसके पहले ही मुख्य दीवार (पाल) में रिसाव आ गया था। काली मिट्टी की परत दरकने से पानी का बहाव शुरू हो गया था। जिससे डेम फूटने की स्थिति निर्मित हो गई थी। आनन-फानन में प्रशासन को बांध के समीप खुदाई कर पानी निकासी का रास्ता बनाना पड़ा था।
ब्लैक लिस्टेड कंपनी, फिर से करना होगा निर्माण
प्रारंभिक जांच के आधार पर शासन ने डेम निर्माण करने वाले कंपनी एएनएस कंस्ट्रक्शन प्रालि दिल्ली को ब्लैक लिस्टेड किया था। लेकिन किसी तरह की कानूनी नहीं हुई। उधर, जल संसाधन विभाग के तत्कालीन कार्यपालन यंत्री बीपी मीना का कहना है कि अर्थ वर्क सहित टूट-फूट की जवाबदारी कंपनी की है, इसलिए जिसे दोबारा से डेम बनाना होगा। कंपनी को सभी तरह के भुगतान रोक दिए हैं।
42 गांवों की हजारों हेक्टेयर जमीन सिंचित होती
कोठीदा बांध बनने से गुजरी, धामनोद सहित जिले के धरमपुरी, मनावर एवं खरगोन जिले की महेश्वर तहसील में 42 ग्रामों में 10500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का दावा किया था। लेकिन डेम फूटने के बाद किसानों का सपना अधूरा रह गया।
केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट का इंतजार
डैम निर्माण में विसंगति और तकनीकी खामियां उजागर हुई थी। यहां केंद्र और राज्य सरकार द्वारा गठित दल जांच के लिए पहुंचा था। केंद्रीय जल आयोग भी जांच कर गया था। जिसकी रिपोर्ट आना शेष है। जिसके चलते कोई प्रोग्रेस नहीं हुई। डेम का काम 11 महीने से बंद पड़ा है।
न रिकवरी और न ही जुर्माना
गुजरी क्षेत्र के समाजसेवी लोकेश सोलंकी द्वारा डेम निर्माण में भ्रष्टाचार को लेकर सबसे पहले आवाज उठाई थी। सोलंकी का कहना है कि कारम डेम को तोडक़र फिर से बनाना चाहिए। रिपेयरिंग से काम नहीं चलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि बांध निर्माण में नियुक्त एजेंसी, ठेकेदार द्वारा खुलेआम भ्रष्टाचार किया। जिसके खिलाफ कोई लीगल एक्शन नहीं लिया गया और तो और जलसंसाधन विभाग के आठ दोषी अधिकारी, इंजीनियर आदि को शासन ने सस्पेंड किया था। नियमानुसार वसूली और जुर्माना होना था, जो नहीं हुआ।
यह भी पढ़ेंः
रिपोर्ट नहीं आई...
दिल्ली से केंद्रीय जल आयोग की टीम कारम बांध का दौरा कर गई थी। जिसकी रिपोर्ट अभी नहीं आई है। रिपोर्ट के बाद तकनीकी कारण पता चलेंगे। सालभर से कोई काम नहीं हुआ। बारिश के बाद काम चालू हो सकता है।
बीपी मीना, कार्यपालन यंत्री जलसंसाधन विभाग
सरकार की अनदेखी...
बांध फूटने से कई आदिवासियों की खेत और घर डूब में चले गए। यह लोग आज पहाड़ों पर रहने को मजबूर है। जिन्हें कोई मुआवजा नहीं मिला।सरकार की अनदेखी है। ध्यान भटकाने के लिए कुछ अधिकारियों को सस्पेंड किया। लेकिन इससे पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पाया।
पांचीलाल मेड़ा, विधायक धरमपुरी
Updated on:
27 Jul 2023 06:09 pm
Published on:
27 Jul 2023 06:03 pm
बड़ी खबरें
View Allधार
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
