8 फ़रवरी 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Magh Purnima 2025 Date: फरवरी में कब रखा जाएगा माघ पूर्णिमा व्रत, जानिए डेट और शुभ मुहूर्त

Magh Purnima 2025 Date: भगवान विष्णु को पीले वस्त्र, पीले फूल, और तुलसी दल अर्पित करें, जबकि माता लक्ष्मी को लाल या गुलाबी फूल और श्रृंगार सामग्री चढ़ाएं।

2 min read
Google source verification

भारत

image

Sachin Kumar

Feb 06, 2025

Magh Purnima 2025 Date

माघ पूर्णिमा

Magh Purnima 2025 Date: हिंदू धर्म में माघ पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस शुभ तिथि पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। माघ मास में पड़ने वाली पूर्णिमा को माघी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। आइए जानते हैं माघ पूर्णिमा की तारीख और शुभ मुहूर्त।

माघ पूर्णिमा का महत्व

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार माघ पूर्णिमा के दिन गंगा, यमुना या त्रिवेणी संगम जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने से जातक को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस तिथि पर पवित्र स्नान से ही मनुष्य के पापों का नाश होता है और आत्म शुद्धि मिलती है।
इसके अलावा यह दिन भगवान विष्णु और शिव की पूजा के लिए भी खास है। माघ मास में नियमित स्नान, दान और व्रत से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। माघ पूर्णिमा के दिन किए गए दान, जैसे अनाज, वस्त्र, या धन, का पुण्य कई गुना अधिक होता है।

शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार माघ पूर्णिमा की शुरुआत 11 फरवरी मंगलवार को शाम 06 बजकर 55 मिनट पर होगी। वहीं अगले दिन 12 फरवरी दिन बुधवार को शाम 07 बजकर 22 मिनट पर संपन्न होगी।

पूजा विधि

माघ पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करें। यदि नदी में स्नान संभव न हो, तो घर पर ही स्नान करते समय जल में गंगाजल मिलाएं। भगवान विष्णु और शिव का अभिषेक करें। उन्हें तिल, गुड़, और फूल अर्पित करें।

दान-पुण्य

माघी पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु की कथा सुनें या पढ़ें। भगवान विष्णु की काथ सुनने से जातक के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। पूजा के बाद गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और दान देना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसलिए अपनी क्षमता अनुसार गरीबों को कुछ दान करें।

माघ पूर्णिमा से जुड़े धार्मिक कार्य

गंगा स्नान: माघ मास में गंगा स्नान को सर्वाधिक पुण्यदायी माना गया है। यह मोक्ष प्राप्ति और पापों के नाश का मार्ग है।

ध्यान और साधना: इस दिन ध्यान और साधना करने से आत्मिक शांति मिलती है।

तर्पण और श्राद्ध: पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म किए जाते हैं।

माघ पूर्णिमा केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि और धर्म के प्रति आस्था का प्रतीक है। यह दिन हमें प्रकृति, जीवन, और ईश्वर के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर देता है।

यह भी पढ़े: इस शुभ योग में रखा जाएगा जया एकादशी व्रत, जानिए पूजा विधि और पद्मपुराण में बताया महत्व

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियां पूर्णतया सत्य हैं या सटीक हैं, इसका www.patrika.com दावा नहीं करता है। इन्हें अपनाने या इसको लेकर किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले इस क्षेत्र के किसी विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।