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शनि के दुष्प्रभाव से बचने का सबसे ताकतवर उपाय, पहले ही दिन से दिखने लगता है असर

शनि को दंड के विधान के तहत न्याय का देवता माना गया है। ऐसे में कई बार हमारे द्वारा भूल से की गई किसी गलती का भी वे दंड हमें प्रदान करते हैं। वहीं शनि के दंड क प्रभाव को काफी कम करने के लिए कुछ विशेष उपाय भी हैं।

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Deepesh Tiwari

Dec 09, 2022

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सनातन हिंदू धर्म में शनि (shani dev) को न्याय का देवता माना जाता है। ऐसे में उनके द्वारा दिए जाने वाले कर्म दंड के चलते करीब सभी लोग शनि (shani dev) की दशा आने से भय खाते हैं। जबकि ज्योतिष के जानकारों सहित पंडितों का भी ये मानना है कि शनि देव (shani dev) किसी का बुरा नहीं करते वे तो जातक को केवल उसके कर्मों का फल प्रदान करते हैं। यानि वे जातक जिन्होंने पूर्व काल यानि शनि की दशा आने से पूर्व कुछ बुरे कर्म किए थे उन्हें शनि (shani dev) दंड देते हैं। जबकि वे जातक जिनके कर्म सदैव शुद्ध रहे उन्हें शनि देव कभी न सताते हुए उल्टा आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

ऐसे में आपको बता दें कि शनि देव (shani dev) के लिए सप्ताह में पूजा का मुख्य दिन शनिवार का होता है। इसी दिन शनि के प्रभाव से मुक्ति के लिए लोग हनुमानजी की भी पूजा करते हैं।

लेकिन बहुत कम ही लोगों को जानकारी है कि शनि के दोष से मुक्ति के लिए सबसे अच्छा तरीका इस दिन देवी मां काली की पूजा है। इसका कारण ये है कि शनि (shani dev)को संचालित करने वाली देवी देवी माता काली ही मानी गई है। इनकी पूजा के फलस्वरूप शनि की साढेसाती से लेकर ढैय्या तक का असर कम हो जाता है।

पंडित सुनील शर्मा के अनुसार आम लोगों में अवधारणा है कि हनुमान जी की पूजा से शनि (shani dev) का दोष पूर्ण रूप से खत्म हो जाता है और शनि का उन पर कोई असर नहीं होता। लेकिन पंडित शर्मा के अनुसार शनि (shani dev) को दंड के विधान के तहत न्याय का देवता बनाया गया है। अत: उनके प्रभाव को शून्य करना नामुमकिन है इसी के कारण माता काली भी इनके प्रभाव को शून्य नहीं करती हैं। इसकी जगह अपने भक्तों पर हनुमान जी व माता काली शनि के प्रभाव को काफी कम कर देते है।

शनि से बचाव का सबसे खास उपाय:
यदि आप या आपका कोई अपना शनि (shani dev) के दोष से प्रभावित है तो ऐसे में जानकारों के अनुसार ऐसे जातक को हर शनिवार माता काली की शाम के समय पूजा करनी ही चाहिए इसके अलावा सुबह के समय ऐसा जातक हनुमान जी की पूजा कर शनि द्वारा प्रदत्त परेशानी से काफी हद तक मुक्ति पा सकता है।

मां काली की पूजा के तहत देवी काली की पूजा काले कपड़ों में स्नान के पश्चात करें। वहीं देवी काली की पूजा के पश्चात भगवान शिव की पूजा भी अवश्य करें, क्योंकि भगवान शिव शनि (shani dev) के गुरु भी हैं और उनकी पूजा से शनिदेव भी प्रसन्न होते हैं।


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