हजारों साल से यहां स्थापित है दिव्य फरसा
आज रविवार 26 अप्रैल, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि “अक्षय तृतीया” का पर्व है। आज ही के दिन भगवान श्री परशुराम जी का जन्मोत्सव “परशुराम जयंती” भी मनाया जाता है। भगवान परशुराम जी अजर अमर चिरंजीवी माना जाता है। भगवान श्री परशुराम ने इस प्रकृति पर आतंक फैलाने वाले अनेक अधर्मियों का अपने फरसे से कई बार वध किया था। कहा जाता है कि जिस फरसे से भगवान परशुराम ने दुष्टों का संहार किया थ वह फरसा आज भी भारत भूमि में स्थान पर सुरक्षित गड़ा हुआ है। जानें अखिर कहां है पर दर्लभ फरसा।
हजारों साल से यहां स्थापित है फरसा
भारत के झारखंड राज्य में रांची शहर से करीब 150 किमी की दूरी पर घने जंगलों में स्थित टांगीनाथ धाम है, जहां भगवान परशुराम जी का फरसा गड़ा हुआ है। यह इलाका नक्सल प्रभावित है। यहां स्थानीय भाषा में फरसा को टांगी कहा जाता है, इसलिए इस जगह का नाम टांगीनाथ धाम हो गया। यह फरसा यहां हजारों साल से बिना किसी देखभाल के गड़ा हुआ है लेकिन आज तक इस पर जंग नहीं लगा है। लोगों का कहना है कि फरसा भूमि में कितना गड़ा हुआ है, यह कोई नहीं जानता।
प्रचलित कथा
परशुराम जी के फरसे के बारे में एक कहानी भी प्रचलित है। कहा जाता है कि एक बार इस इलाके में कुछ लोहार आकर रहने लगे थे। काम के दौरान उन्हें लोहे की जरूरत हुई तो उन्होंने परशुराम का यह फरसा काटने की कोशिश की। काफी कोशिश के बाद भी वे फरसा नहीं काट पाए, लेकिन इसका नतीजा बहुत बुरा हुआ। उस परिवार के सदस्यों की मौत होने लगी। इसके बाद उन्होंने वह इलाका छोड़ दिया। आज भी टांगीनाथ धाम के आसपास लोहार नहीं रहते।
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