
महागौरी की पूजा
मां महागौरी का स्वरूप
देवी महागौरी की सवारी बैल है। इनके चार हाथ हैं, वह एक दाहिने हाथ में त्रिशूल रखती हैं और दूसरे दाहिने हाथ को अभय मुद्रा में रखती हैं। वह एक बाएं हाथ में डमरू धारण करती हैं और दूसरे बाएं हाथ को वर मुद्रा में रखती हैं। गौर वर्णा महागौरी की तुलना उनके गोरे रंग के कारण शंख, चंद्रमा और कुंद के सफेद फूल से की जाती है। यह सफेद वस्त्र धारण करती हैं और इसी कारण उन्हें श्वेतांबरधरा भी कहा जाता है।
महागौरी आराधना का महत्व
मां महागौरी का प्रिय पुष्प रात रानी है। नवरात्रि के आठवें दिन इनकी पूजा होती है और राहु ग्रह पर इनका नियंत्रण है। राहु दोष से निवारण के लिए इनकी पूजा आवश्यक है। महागौरी की आराधना से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं, समस्त पापों का नाश होता है, सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है और हर मनोकामना पूर्ण होती है।
दुर्गाष्टमी महागौरी की पूजा विधि
1. इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान ध्यान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें
2. रोज की तरह कलश को नमन कर मां महागौरी का ध्यान करें
3. मां की प्रतिमा को गंगाजल से स्नान कराएं।
4. सफेद रंग के वस्त्र और पुष्प अर्पित करें।
5. रोली, कुमकुम, पंचमेवा, फल और काले चने का भोग अर्पित करें।
6. सौभाग्य और सुहाग की मंगल कामना को लेकर चुनरी चढ़ाएं।
7. महागौरी का ध्यान करें, उनके मंत्र का जाप कर आरती करें।
हाथ जोड़कर यह मंत्र पढ़ें
सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि। सेव्यामाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥'
8. इसके बाद महागौरी देवी के विशेष मंत्रों का जाप करें और सुख, सौभाग्य के लिए प्रार्थना करें।
9. कन्या पूजन कर उन्हें भोजन कराएं।
मां महागौरी का मंत्र
1. ॐ देवी महागौर्यै नमः॥
महागौरी का प्रार्थना मंत्र
2. श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।।
मां महागौरी की स्तुति
3. या देवी सर्वभूतेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
ध्यान
वन्दे वाञ्छित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
सिंहारूढा चतुर्भुजा महागौरी यशस्विनीम्॥
पूर्णन्दु निभाम् गौरी सोमचक्रस्थिताम् अष्टमम् महागौरी त्रिनेत्राम्।
वराभीतिकरां त्रिशूल डमरूधरां महागौरी भजेम्॥
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम्।
मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
प्रफुल्ल वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोलाम् त्रैलोक्य मोहनम्।
कमनीयां लावण्यां मृणालां चन्दन गन्धलिप्ताम्॥
स्तोत्र
सर्वसंकटहन्त्री त्वंहि धन ऐश्वर्य प्रदायनीम्।
ज्ञानदा चतुर्वेदमयी महागौरी प्रणमाम्यहम्॥
सुख शान्तिदात्री धन धान्य प्रदायनीम्।
डमरूवाद्य प्रिया अद्या महागौरी प्रणमाम्यहम्॥
त्रैलोक्यमङ्गल त्वंहि तापत्रय हारिणीम्।
वददम् चैतन्यमयी महागौरी प्रणमाम्यहम्॥
कवच
ॐकारः पातु शीर्षो माँ, हीं बीजम् माँ, हृदयो।
क्लीं बीजम् सदापातु नभो गृहो च पादयो॥
ललाटम् कर्णो हुं बीजम् पातु महागौरी माँ नेत्रम् घ्राणो।
कपोत चिबुको फट् पातु स्वाहा माँ सर्ववदनो॥
आरती
जय महागौरी जगत की माया। जय उमा भवानी जय महामाया॥
हरिद्वार कनखल के पासा। महागौरी तेरा वहा निवास॥
चन्द्रकली और ममता अम्बे। जय शक्ति जय जय माँ जगदम्बे॥
भीमा देवी विमला माता। कौशिक देवी जग विख्यता॥
हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा। महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा॥
सती (सत) हवन कुंड में था जलाया। उसी धुएं ने रूप काली बनाया॥
बना धर्म सिंह जो सवारी में आया। तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया॥
तभी माँ ने महागौरी नाम पाया। शरण आनेवाले का संकट मिटाया॥
शनिवार को तेरी पूजा जो करता। माँ बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता॥
भक्त बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो। महागौरी माँ तेरी हरदम ही जय हो॥
Updated on:
21 Oct 2023 10:26 pm
Published on:
21 Oct 2023 10:25 pm
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