- 31 जुलाई को सावन अधिक मास का सोमवार
सावन को शिव भक्ति का पवित्र महीना माना जाता है। वहीं इस साल सावन के बीच में अधिक मास लग जाने से सावन का महीना 59 दिन का पड रहा है। इसके चलते सावन में इस बार 4 नहीं बल्कि 8 सोमवार पड रहे हैं। इस बार श्रावण अधिकमास का सोमवार 31 जुलाई 2023, को होगा। मान्यता के अनुसार इस दिन भोलेनाथ की पूर्ण श्रृद्धा के साथ पूजा-अर्चना करने से शुभ फल मिलता है। वहीं सावन में हर रोज शिवलिंग पर जल अर्पित करने का भी अपना ही महत्व है, इसमें भी सोमवार के दिन शिवलिंग पर जल अर्पित करना अति विशेष माना जाता है।
ज्योतिष के जानकारों के मुताबिक इस बार 31 जुलाई को पडने जा रहे सावन अधिक मास के सोमवार पर शिवलिंग पर जल अवश्य चढाएं, इसका कारण ये है कि मान्यता के अनुसार ऐसा करने से हर मनोकामना पुरी होती है।
वहीं वे कन्याएं जो अभी कुंवारी हैं औरे सावन सोमवार का व्रत रखती हैं, धार्मिक मान्यता के अनुसार उन्हें मनचाहा जीवन साथी प्राप्त होता है। वहीं सावन में हर कोई बाबा भोलेनाथ की पूजा कर सकता है, माना जाता है कि ऐसा करने से भगवान शिव प्रसन्न होकर उसकी समस्त इच्छाएं पूर्ण करते हैं। ऐसे में चलिए सबसे पहले जानते हैं कि सावन अधिक मास के सोमवार में भगवान शिव के किन मंत्रों का जाप विशेष फलदायक होता है...
अधिक मास सोमवार: इन शिव मंत्रों का करें जाप-
नम: शिवाय ॐ नम: शिवाय।
ॐ नम: शिवाय।
शंकराय नम: ।
ॐ महादेवाय नम:।
ॐ महेश्वराय नम:।
ॐ श्री रुद्राय नम:।
ॐ नील कंठाय नम:।
महामृत्युंजय मंत्र-
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
सावधानियां- मंत्र उच्चारण के समय...
1. मंत्र उच्चारण में वर्तनी और शुद्धता का खास ध्यान रखें।
2. रूद्राक्ष की माला से ही जाप करें।
3. शिव जी की प्रतिमा, तस्वीर, शिवलिंग या महामृत्यु यंत्र जाप के समय आपके नजदीक ही हों।
4. हमेशा आसन पर बैठकर ही महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए।
5. अपना मुख जप के समय पूर्व दिशा को रखें।
6. मंत्र का जाप सदैव एक निश्चित जगह पर ही करें यानि अपनी जगह में बदलाव कभी न करें।
सावन अधिक मास सोमवार में पूजा: ऐसे करें
- सावन में प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान के पश्चात साफ वस्त्र पहनें।
- गंगा जल से अपने मंदिर को शुद्ध करें।
- शिवलिंग को एक थाली में रखने के पश्चात इन पर जल, गंगा जल और दूध चढाएं।
- इस दिन सफेद चंदन शिवलिंग पर अवश्य लगाएं।
- बेलपत्र, धतूरा, फूल, फल और मेवा शिवलिंग पर चढ़ाएं।
- इस दिन शिव चालीसा का पाठ अवश्य करना चाहिए।
- फिर भगवान शिव की आरती अवश्य करें।
- वहीं इस दिन शिव मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी अवश्य करना चाहिए।