सैंपऊ उपखण्ड में लधपुरा माइनर की शुक्रवार रात पटरी टूट से तसीमों के किसानों के खेतों में पानी भर गया। जिससे सरसों की करीब सात बीघा फसल जलमग्न हो गई।
धौलपुर. सैंपऊ उपखण्ड में लधपुरा माइनर की शुक्रवार रात पटरी टूट से तसीमों के किसानों के खेतों में पानी भर गया। जिससे सरसों की करीब सात बीघा फसल जलमग्न हो गई। शनिवार सुबह जब किसान खेतों पर पहुंचे तो माइनर की पटरी टूटी हुई थी जिससे खेतों में पानी भर गया। उधर, किसानों ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को सूचना देने के लिए फोन किया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे पार्वती परियोजना के नहर अध्यक्ष योगेश तिवारी ने सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता पपेंद्र मीणा को सूचना देकर मुख्य नहर से माइनर की गेट को बंद कराया और मरम्मत कराने के लिए अवगत कराया। अधिशासी अभियंता के हस्तक्षेप के बाद पटरी की मरम्मत कराई गई। किसानों ने बताया तसीमों गांव के निकट हर बार माइनर की पटरी कुलाबे मे कचरा फंस जाने कारण टूट जाती है जिससे काफी नुकसान उठाना पड़ता है।
महिलाओं को लौटाया, चिकित्सक टीम की कार्यप्रणाली पर जताई नाराजगी
सैंपऊ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर शनिवार को परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत जनसंख्या उन्मूलन शिविर का आयोजन हुआ। राष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान शिविर में अव्यवस्था देखने को मिली है। ऑपरेशन कराने आई कई महिलाएं सुबह से भूखी प्यासी अस्पताल में रजिस्ट्रेशन कराने के बाद चिकित्सा टीम का इंतजार करती रही। जिला अस्पताल से पहुंची चिकित्सा टीम ने कुछ महिलाओं को बिना ऑपरेशन किए ही वापस लौटा दिया। शिविर के दौरान 62 महिलाओं का नसबंदी के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था। जिला अस्पताल से पहुंचे सर्जन डॉ.रामविलास गुर्जर व चिकित्सा टीम ने करीब 7 महिलाओं को यह कहकर लौटा दिया कि उनका पहले ऑपरेशन होने के कारण नसबंदी नहीं हो सकेगी। नया नगला गांव निवासी महिला केसरिया पिपरी पुरा गांव निवासी महिला कृष्णा घड़ी लज्जा गांव निवासी कमल देवी सहित अलग-अलग गांव से पहुंची करीब 7 महिलाएं बिना नसबंदी कराए ही वापस लौटने के लिए विवश रही हैं। ऑपरेशन कराने के लिए उत्साहित करने वाले कर्मचारियों सहित महिलाओं का आरोप है कि पूर्व में कई बार ऑपरेशन से बच्चे पैदा होने वाली महिलाओं के ऑपरेशन हुए हैं। चिकित्सा टीम द्वारा अपनी मनमानी करते हुए महिलाओं का ऑपरेशन नहीं किया है। जिसके चलते महिलाओं को परेशानी उठानी पड़ी। इन आरोपों के बाद जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण करने के लिए आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान हुई लापरवाही गंभीर मामला है।