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यह कैसी देशभक्ति… 5 साल से शहीदों को सम्मान का इंतजार

-2021 में तैयार शहीद स्मारक में अब तक नहीं लगी जिले के शहीदों के नामों की पट्टिका – नगर परिषद का कहना: बजट का अभाव, फाइनल टचिंग होना शेष – सैनिक कल्याण बोर्ड ने जिला प्रशासन को दो बार सौंपी शहीदों की लिस्ट – 20 लाख की लागत से तैयार किया गया मचकुण्ड रोड स्थित […]

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यह कैसी देशभक्ति... 5 साल से शहीदों को सम्मान का इंतजार What kind of patriotism is this... martyrs have been waiting for respect for 5 years

-2021 में तैयार शहीद स्मारक में अब तक नहीं लगी जिले के शहीदों के नामों की पट्टिका

- नगर परिषद का कहना: बजट का अभाव, फाइनल टचिंग होना शेष

- सैनिक कल्याण बोर्ड ने जिला प्रशासन को दो बार सौंपी शहीदों की लिस्ट

- 20 लाख की लागत से तैयार किया गया मचकुण्ड रोड स्थित स्मारक

धौलपुर. राज्य सकरार और जिला प्रशासन की बेरुखी के कारण मचकुण्ड रोड स्थित शहीद स्मारक पांच साल से फाइनल टचिंग का इंतजार कर रहा है। जिस कारण जिले के हमारे हीरो 16 शहीद जवानों को वह सम्मान नहीं मिल पा रहा जिसके वह हकदार हैं। सैनिक कल्याण बोर्ड के दो बार शहीदों की लिस्ट सौंपने के बाद भी अभी तक न ही शहीद पट्टिका लग सकी है और न स्मारक की फाइनल टचिंग दी जा सकी है।

सारा देश आज भले ही 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा हो, लेकिन आज भी हमारे हीरो वीर शहीद जवानों को वह सम्मान नहीं मिल पा रहा जिसके वह हकदार हैं। मामला मचकुण्ड रोड बन रहे शहीद स्मारक का है, जिसका निर्माण 2017 से प्रारंभ हुआ था और 2021 में बनकर भी तैयार हो गया, लेकिन बीते पांच सालों से यह स्मारक अपने शहीद सैनिकों के सम्मान को तरस रहा है और जिला प्रशासन सहित राज्य सरकार की उपेक्षाओं का शिकार बन बैठा है। स्मारक का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है, लेकिन बजट के अभाव के कारण अभी भी फिनिशिंग सहित फाइनल टचिंग देना शेष रह गया है। बजट नहीं मिलने के कारण कॉन्ट्रेक्टर ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं और यही कारण है कि लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूर्ण होने के बाद भी अभी तक शहीद स्मारक लोगों के लिए नहीं खोला गया है।

वसुंधरा सरकार ने दी थी सौगात

तत्कालीन वसुंधरा राजे सरकार ने 2017 में राज्य के हर जिले में वीर सैनिकों के सम्मान, युवाओं को शहीद सैनिकों की शौर्य गाथाओं से प्रेरित करने और मातृभूमि के लिए उनके सर्वोच्च बलिदान को अमर बनाने को राज्य के हर जिले में शहीद स्मारक बनाने का निर्णय लिया गया था। जिसका जिम्मा जिला प्रशासन सहित नगर निकायों को सौंपा गया था। हर जिले में बनने वाले शहीद स्मारक के लिए सरकार ने 20-20 लाख रुपए का बजट भी तय किया गया था। इसके लिए भूमि आवंटन के प्रावधान के तहत शहीदों के गांव या जिले में 500 वर्ग मीटर तक भूमि नि:शुल्क आवंटित की जा रही है। तत्कालीन सरकार ने प्रदेश में 1100 से अधिक शहीदों की प्रतिमाएं लगाने की पहल की थी।

दो बार सौंपी लिस्ट, पर नहीं लगी पट्टिका

शहीदों के सम्मान और युवाओं को देशभक्ति की ओर पे्ररित करने के लिए मचकुण्ड रोड पर तैयार किए गए शहीद स्मारक में देश की सेवा में अपनी जान न्यौछावर करने वाले जिले के 16 वीर सपूतों के नाम की उल्लेखित पट्टिका लगाई जानी है, लेकिन 2022 और 2024 में जिला सैनिक बोर्ड भरतपुर धौलपुर के माध्यम से शहीद सैनिकों के नामों की लिस्ट जिला प्रशासन को देने और नगर परिषद को अवगत कराने के बाद भी अभी तक शहीदों की पट्टिका नहीं लग सकी है। नगर परिषद का भी कहना है कि उनको अभी तक शहीदों के नामों की लिस्ट नहीं मिल पाई है।

पांच साल से फाइनल टचिंग का इंतजार

बजट के अभाव के कारण शहीद स्मारक का जो थोड़ा काम शेष रह गया है, उसके एवज में स्मारक का जो काम हो गया है वह भी अपनी आभा खोता जा रहा है। दरअसल स्मारक लगभग पूर्ण तो हो चुका है, लेकिन उसकी फाइनल टचिंग होना शेष है, जबकि मौसम की मार और देखरेख न होने के कारण स्मारक की जो डेंटिंग पेंटिंग हो रखी थी सब बदरंग हो चुकी है तो वहीं कई जगह से स्मारक की पट्टिकाएं भी निकल आई हैं। ज्ञात हो कि इस स्मारक में जिले के शहीदों के नाम शिला पट्टों पर अंकित किए जाएंगे। ये शहीद स्मारक युवाओं में देशभक्ति और राष्ट्रप्रेम की भावना जगाने वाले केंद्र के रूप में कार्य करेंगे।

बजट के अभाव के कारण स्मारक में कुछ काम शेष रह गया है। स्मारक की फिनशिंग और फाइनल टचिंग देना है, लेकिन सरकार से अभी तक बजट नहीं मिल पाया है, जिस कारण कॉन्ट्रेक्टर ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं।

-गुमान सिंह सैनी, एक्सइएन नगर परिषद धौलपुर

वसुंधरा सरकार ने शहीद सैनिकों के सम्मान में शहीद स्मारक का निर्माण कराया गया था, जिसमें जिले के शहीदों के नाम की पट्टिका लगनी है। शहर प्रशासन को सैनिक कल्याण बोर्ड ने दो बार लिस्ट देने के बाद भी अभी तक पट्टिका नहीं लग सकी है।

-प्रणव मुखर्जी, सह सचिव अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद

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