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शरद मेला: बड़ी दुकानों का सजा सामान, फुटपाथियों के बिखरे अरमान

ऊंची और बड़ी दुकानें किसी मेला की शान भेले ही सकती हैं लेकिन फुटपाथों पर सजने वाली दुकानें मेला की जान मानी जाती हैं। जिनसे हर कोई आसानी से खरीदारी कर सकता है। लेकिन किसी की जान को ही खत्म कर दिया जाए तो वह बेजान हो जाता है। धौलपुर के शरद मेला महोत्सव में भी यही देखने को मिल रहा है। इस बार मेला को ठेके पर दिए जाने के कारण फुटपाथ पर लगी दुकानों को जबरन हटाया जा रहा है।

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शरद मेला: बड़ी दुकानों का सजा सामान, फुटपाथियों के बिखरे अरमान Sharad Mela: Goods sold in big shops, wishes scattered on footpaths

- मेला के ठेका पर जाने से फुटपाथी दुकानों पर संकट

- छोटे दुकानदार बड़ा शुल्क देने में असमर्थ, तोड़ी दुकानें

- सालों से करते हैं इंतजार, बोले:अब कहां लगाएंगे दुकान

धौलपुर. ऊंची और बड़ी दुकानें किसी मेला की शान भेले ही सकती हैं लेकिन फुटपाथों पर सजने वाली दुकानें मेला की जान मानी जाती हैं। जिनसे हर कोई आसानी से खरीदारी कर सकता है। लेकिन किसी की जान को ही खत्म कर दिया जाए तो वह बेजान हो जाता है। धौलपुर के शरद मेला महोत्सव में भी यही देखने को मिल रहा है। इस बार मेला को ठेके पर दिए जाने के कारण फुटपाथ पर लगी दुकानों को जबरन हटाया जा रहा है।

धौलपुर के शरद महोत्सव मेला का आयोजन प्रतिवर्ष होता है। जिसका इंतजार छोटे दुकानदार साल भर करते हैं। इन दुकानदारों में आगरा, भरतपुर, मुरैना सहित अन्य दूर दराज राज्यों के दुकानदार दो रुपए की चाह में यहां आते हैं। जो कि फुटपाथों पर दुकान सजाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं, लेकिन इस साल नगर परिषद ने मेला को ठेके पर देने के कारण इन छोटे दुकानदारों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। मेला का ठेका आगरा के व्यवसायी ने 83 लाख रुपए पर लिया है। जो अब अपने हिसाब से दुकानदारों को जमीन का आवंटन कर रहा है।

मोटा शुल्क देने में असमर्थ छोटे दुकानदार

मेला का ठेका 83 लाख रुपए में हुआ है। ठेकेदार भी चाहेगा कि उसकी रकम के साथ उसे कुछ मुनाफा भी हो। जिस हिसाब से मेला प्रांगण में एक दुकान का आवंटन 100 रुपए प्रति फीट के हिसाब से दिया जा रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि फुटपाथ पर छोटी दुकानें सजाने वाले दुकानदार इतना शुल्क देने में असमर्थ हैं। यह दुकानदार यहां पिछले 30 सालों से दुकानें लगाते आए हैं। जिस कारण उन्हें उनकी सुविधानुसार शुल्क देकर जगह का आवंटन किया जाना चाहिए।

तो कहां जाएंगे फुटपाथी दुकानदार

मेला का आयोजन मचकुण्ड रोड स्थित नगर परिषद के बगल से मेला ग्राउण्ड में किया जाता रहा है और दुकानें भी सदा मेला ग्राउण्ड में ही लगाई जाती रही हैं। मचकुण्ड रोड पर बनी फुटपाथ पर हर साल छोटे दुकानदार अपनी दुकानें लगाते आए हैं। जिसके एवज में वह हर वर्ष नगर परिषद को शुल्क अदायगी भी करते रहे हैं। लेकिन इस बार मेला का ठेका होने के कारण उनकी दुकानों को और सामानों को उखाड़ फेंक दिया गया है। अब सवाल यह है कि यह छोटे दुकानदार आखिर कहां जाएंगे। क्योंकि ठेकेदार के अनुसार मचकुण्ड गेट तक उनका ठेका है। गेट से आगे नेशनल हाइवे है। मचकुण्ड तरफ वीरना और अंधेरा पसरा रहता है। तो ऐसी स्थिति में अब यह फुटपाथी दुकानदार कहां जाएंगे। ऐसे तो इस बार उनके सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।

दूर दराज से आते हैं दुकानदार

मेला में दुकानें लगाने वाले दुकानदारों का कहना है कि हमा जैसे दुकानदार न सिर्फ आसपास के शहरों से बल्कि आगरा, भरतपुर, फिरोजाबाद, मुरैना सहित अन्य राज्यों से भी आए हैं। जिनमें कोई खिलौना वाला है तो कोई चूड़ी वाला तो कोई घरेलू सामग्री तो कोई सिल बट्टा बचने वाला है। जो मेला में शिरकत कर मेला की रौनक को बढ़ाते हैं।

इस वर्ष मेला को ठेके पर दिया गया है। फुटपाथ पर पार्किंग की व्यवस्था की जाएगी। जहां दोपहिया वाहन और साइकिल खड़े हो सकें।

-अशोक शर्मा, नगर आयुक्त

फुटपाथ से किसी भी दुकानदार को नहीं हटाया जा रहा है। मेला गेट से लेकर मुख्य गेट तक ठेका हुआ है। छोटे दुकानदारों से बैठकर बात की जाएगी। वह जो शुल्क देंगे हमें अच्छा लगेगा तो रखेंगे।

-हुसैन, शरद मेला ठेकेदार

हम यहां कई सालों से दुकान लगाते आए हैं। हर साल नगर परिषद को दुकान लगाने का शुल्क भी देते रहे हैं। लेकिन इस बार मेला का ठेका होने के कारण हमें यहां से हटाया जा रहा है। हम यहां बड़ी उम्मीद से आते हैं।

अनिल शर्मा, खिलौना विक्रेता

मेला ठेकेदार का शुल्क अदा करना हमारे वश में नहीं है। हमारी दुकानों में 10 हजार रुपए तक का सामान नहीं होता तो उनको इतना शुल्क कहां से दें। नगर परिषद और प्रशासन को हमारा भी ख्याल करना चाहिए।

अजीत सिंह, चाट विक्रेता

धौलपुर मेला का इंतजार हम साल भर करते हैं। कई सालों से हम यहां दुकान लगाते रहे हैं। हम छोटे दुकानदार हैं। जो बड़ी मुश्किल से अपना पेट पालते हैं। अगर हमें यहां से हटा दिया जाएगा तो हम कहां जाएंगे।

रूपा, रसोई सामान विक्रेता