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तीर्थराज मचकुण्ड: लाइटें और फव्वारे पड़े बंद, शाम होते ही ‘ब्लैक नाइट शो’

Tirtharaj Machkund news dholpur:धौलपुर. लाल बलुआ पत्थर के लिए देशभर में प्रसिद्ध धौलपुर में पर्यटन की अपार सम्भावनाएं हैं लेकिन स्थानीय प्रशासन व पर्यटन विभाग की सुस्ती की वजह से उसे वो पहचान नहीं मिल पाई है,

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Tirtharaj Machkund: Lights and fountains are closed, 'Black Night Show' in the evening

तीर्थराज मचकुण्ड: लाइटें और फव्वारे पड़े बंद, शाम होते ही ‘ब्लैक नाइट शो’

Tirtharaj Machkund news dholpur:धौलपुर. लाल बलुआ पत्थर के लिए देशभर में प्रसिद्ध धौलपुर में पर्यटन की अपार सम्भावनाएं हैं लेकिन स्थानीय प्रशासन व पर्यटन विभाग की सुस्ती की वजह से उसे वो पहचान नहीं मिल पाई है, जिसका वो हकदार है। पर्यटन के लिहाज से शहर में तीर्थस्थल मचकुण्ड प्रसिद्ध है और बड़ी संख्या में यहां देशी-विदेशी सैलानी पहुंचते हैं। हालांकि, अधिकतर लोग देवछठ पर लगने वाले लक्खी मेला पर आते हैं, जिसमें एक दिन में लाखों की संख्या में मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश समेत अन्य राज्यों से लोग पहुंचते हैं। मचकुण्ड को तीर्थों का भांजा कहकर भी पुकारा जाता है लेकिन वर्तमान में जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते यह स्थल अंधेरे में पड़ा है और शाम होते ही यहां लोग रुकना पसंद नहीं करते हैं। यहां पुरातत्व विभाग की ओर से लगाई लाइटिंग और रंगीन फव्वारे दो माह से बंद पड़े हैं। संचालन का जिम्मा संभाल रही नगर परिषद को लाडली जगमोहन मंदिर के महंत कृष्णदास स्वयं आयुक्त को अवगत करा चुके हैं लेकिन इसके बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

निराश होकर लौट रहे शहरवासी व पर्यटक

मचकुण्ड सरोवर में 7 फव्वारों की नाव डली हैं। प्रत्येक नाव से रंगीन पानी की 9 धाराएं निकलती हैं। लेकिन बीते दो माह से फव्वारे बंद पड़े हैं। साथ ही परिक्रमा मार्ग और घाटों पर लगी लाइटें बंद हैं। लाइटें नहीं जलने से शाम होते ही परिसर अंधेरे में डूब जाता है। जबकि इनके संचालन का जिम्मा नगर परिषद के पास हैं। फिलहाल नगर परिषद प्रशासन पुरातत्व विभाग से वार्ता करने की बात कहकर पल्ला झाडऩे में लगा है। उधर, नगर परिषद की ओर से लगाई हाइ मास्क लाइटें भी खराब पड़ी हैं। जिनकी भी प्रशासन ने कोई सुध नहीं ली है। शाम को ही यहां घूमने के लिए शहरवासी और पर्यटक पहुंचते हैं लेकिन तब अंधेरा होने से पर्यटक ज्यादा भ्रमण नहीं कर पाते हैं और निराश होकर लौट जाते हैं।

पीएम स्वदेश दर्शन योजना के तहत हुए करोड़ों खर्च

मचकुण्ड परिसर में प्रधानमत्री स्वदेश दर्शन योजना के तहत करोड़ों के रुपए के कार्य हुए हैं। पुरातत्व विभाग की ओर से कार्य कराने के बाद संचालन के लिए नगर परिषद के सुपुर्द कर दिया। नगर परिषद ने विद्युत निगम से कनेक्शन लेकर परिसर में लगाई विभिन्न रंगीन लाइटों को शुरू कराया। साथ ही फव्वारों की नावों का प्रतिदिन प्रदर्शन करवाया गया। इसके साथ ही यहां इमारत पर मचकुण्ड महाराज और इससे जुड़ी ऐतिहासिक कहानी को बताने के लिए लाइट एण्ड साउण्ड शो भी होता है। लेकिन वर्तमान में लाइटें लम्बे समय से खराब पड़ी हैं। केवल सादा शो होता है। लेकिन रंगीन लाइटें नहीं जलने से सबकुछ फीका रहता है।

दो साल में ही करोड़ों रुपए पर फिरा पानी

मचकुण्ड परिसर को पर्यटन मानचित्र पर लाने के लिए यहां लाइट एण्ड साउण्ड शोर समेत अन्य कार्यकम शुरू किए गए। जिस पर करोड़ों रुपए की राशि खर्च की गई है। लेकिन वर्तमान में यहां लाइटें और फव्वारें बंद पड़े हैं। परिक्रमा मार्ग में अंधेरा रहने से श्रद्धालु शाम को परिक्रमा लगाने से कतराते हैं। उधर, लाडली जगमोहन मंदिर के महंत कृष्णदास मामले में नगर परिषद आयुक्त से मिलकर स्थिति से अवगत करा चुके हैं लेकिन इसके बाद भी लाइटें शुरू नहीं हो पाईं। लाइटें और फव्वारों को नवम्बर माह में दो साल हो जाएंगे। लेकिन रख-रखाव में रुचि नहीं लेने से करोड़ों रुपए के संसाधन खराब हो रहे हैं। मामले में संभागीय आयुक्त के यहां भी शिकायत गई लेकिन कुछ नहीं हुआ है।

लाइटें भी बंद और साउंड भी हल्का पड़ा

लाइट एंड साउंड शो राजस्थान के पहले 3-डी प्रोजेक्शन मैपिंग आधारित लाइट एंड साउंड शो में से एक है। जिसमें 25000 लुमेन के 3 चिप डीएलपी प्रोजेक्टर, डीएमएक्स नियंत्रित एलईडी लाइट्स, 5.1 ऑडियो सराउंड सिस्टम आदि का उपयोग किया जाता है। महाराजा मचकुण्ड की कहानी, राक्षसों के साथ युद्ध में देवताओं (भगवान) को उनका समर्थन, इंद्रदेव के महाराजा मचकुंड को दशकों की लंबी नींद का वरदान, राक्षस कालयवन की ओर से ऋषियों की हत्या और श्रीकृष्ण को मारने की चेतावनी, महाराज की नींद में खलल को दर्शाया गया है। कल्यवन की ओर से मचकुंड, महाराज मचकुंड के कल्यवन का वध, महाराजा मचकुंड के एक जल कुंड का निर्माण, जहां वे वर्षों तक सोते रहे। धौलपुर समेत आसपास के क्षेत्र में मचकुण्ड अपने में विशेष पहचान रखता है। वर्तमान में यहां सादा शो हो रहा है। लाइटें बंद होने से लाइट एण्ड साउण्ड के आनंद से लोग वंचित हैं।

मचकुण्ड परिसर में लाइटें करीब दो माह से बंद पड़ी हैं। साथ ही फव्वारे भी नहीं चल रहे हैं। शाम को यहां लोग आने से कतराते हैं। इस संबंध में स्वयं करीब एक माह पहले आयुक्त नगर परिषद को अवगत करा चुके हैं। फिलहाल कोई ध्यान नहीं दिया गया है।- महंत कृष्णदास, मंदिर लाडली जगमोहन मंदिर, मचकुण्ड

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