
3000 hectares of land of farmers of 48 villages will be submerged in dam water
डिंडोरी. राघोपुर मरवारी बहुउद्देश्यीय बांध निर्माण को लेकर विरोध शुरु हो गया है। बांध निर्माण को लेकर जिले के तीन जनपद पंचायत के सदस्यों के साथ ही ग्रामीणों ने आपत्ति दर्ज कराई है। जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणों का कहना है कि बांधी निर्माण होने से हजारो हेक्टेयर निजी भूमि पानी में डूब जाएगी। ऐसे में उन्हे काफी नुकसान उठाना पड़ेगा। सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर में जनपद पंचायत मेंहदवानी, अमरपुर एवं जनपद पंचायत डिंडोरी के ग्रामीण अपने-अपने क्षेत्र के जनपद सदस्यों को लेकर पहुंचे और राघोपुर मरवारी बहुउद्देशीय बांध को निरस्त करने राज्यपाल के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा है।
प्रस्ताव देने सरपंचों पर बना रहे दबाव
ग्रामीणों के साथ कलेक्ट्रेट ज्ञापन देने आए जनपद सदस्य भागवती मरावी एवं अंजु करचाम ने बताया कि राघोपुर मरवारी बहुउद्देशीय बांध बनने से लगभग 48 ग्रामों के किसानों की लगभग 3000 हेक्टेयर निजी भूमि पानी में डूब जाएगी। बांध निर्माण के लिए अधिकृत ठेकेदार द्वारा संबंधित ग्राम पंचायतों के सरपंचों को प्रस्ताव देने का दवाव बना रहे हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रस्ताव के लिए पैसे का प्रलोभन भी दिया जा रहा है। कलेक्ट्रेट शिकायत करने पहुंचे जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणों ने कहा है कि बांध निर्माण को लेकर पेसा एक्ट का उल्लंघन किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बिना ग्राम पंचायत की अनुमति व ग्राम सभा के प्रस्ताव के किसानों के भूमि का सर्वे नहीं कराए जाने का प्रावधान है।
निरस्त किया जाए बांध निर्माण
ग्रामीणों ने कहा कि किसानों की मांग को ध्यान में रखते हुए राघोपुर मरवारी बहुउद्देशीय बांध निर्माण को निरस्त किया जाए। इससे मेंहदवानी, अमरपुर एवं डिंडोरी जनपद क्षेत्र के लगभग 40 हजार किसान प्रभावित होंगे।
ये रहे शामिल
बांध निर्माण को निरस्त करने की मांग लेकर तीन जनपद पंचायत के ग्रामीण मुख्यालय पहुंचे हुए थे। जिसमें से प्रमुख रूप से आम आदमी पार्टी जिलाध्यक्ष अमर सिंह मार्को, हलधर सिंह धुर्वे, अनिल कुशराम, कमल सिंह कुशराम, लक्ष्मण सिंह सैयाम, सोनवती धुर्वे, मुन्नी बाई, सुहाग बाई, बसंत, सुखसैन, मुकेश सिंह, अशोक सिंह, हेमसिंह, प्रहलाद मरकाम अन्य ग्रामीण शामिल रहे।
जिला सूखा घोषित, भयावह होंगे हालात
जिले में लगातार गिरते जलस्तर के कारण पानी का संकट गहराता जा रहा है और आए दिन पानी की समस्या को लेकर गांव गांव में चक्काजाम किया जा रहा है। वर्तमान में प्रशासन को लोगों के घरों तक पानी पहुंचाने मशक्कत करनी पड़ रही है। कुएं तालाब सूख गए हैं और हैंडपंप हवा उगल रहे हैं। किसानों की जमीन असिंचित है भगवान भरोसे खेती हो रही है। जलस्तर बढ़ाने के साथ ही किसानों की असिंचित भूमि को सिंचित करने बांधो की महती आवश्यकता है। जिले में स्वीकृत बांधों को लेकर राजनीतिक दलों द्वारा ग्रामीणों के साथ मिलकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इधर दिनो दिन जिले में जल संकट गहराता जा रहा है।
Published on:
18 Apr 2023 12:18 pm
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