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चार साल बीत जाने के बाद भी पुल का काम अधूरा, ग्रामीणों की बढ़ी परेशानी

छह माह से बंद पड़ा है पुल निर्माण का कार्य

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Even after four years, bridge work is incomplete, problems of villagers increased

Even after four years, bridge work is incomplete, problems of villagers increased

डिंडौरी/बजाग. ग्रामीणों को आवागमन की बेहतर सुविधा मिल सके इसके लिए शासन पुल पुलिया निर्माण पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। ग्रामीण अंचलों में बारिश के दौरान आवाजाही में होने वाली परेशानी से लोगों को बचाने के लिए बजाग के ग्राम सिंगारसत्ती में एनडीबी से वर्ष 2017-18 में चकरार नदी पर पुल निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई थी। पुल निर्माण को स्वीकृति मिले 4 वर्ष से अधिक समय बीत चुका है और अभी तक निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है। जिले में कराए जा रहे अधिकांश निर्माण कार्य ठेकेदार व निर्माण एजेंसी की उदासीनता के चतले समय पर पूर्ण नहीं हो पाते। आधे अधूरे निर्माण कार्य से लोगो की मुसीबतें और बढ़ जाती हैं और शासन का पैसा और समय दोनो बर्बाद होता है। गणुवत्ताहीन कार्य के साथ ही समय पर कार्य पूरा न होने के बाद भी संबंधितों के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं होती। ठेकेदारों की विभागीय अधिकारियों से गठजोड़ के चलते मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। बजाग मुख्यालय से 5 किलो मीटर दूर सिंगार सत्ती में चकरार नदी पर करोड़ों की लागत से पुल का निर्माण धीमी गति से किया जा रहा है। ठेकेदार की लापरवाही से आज भी कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। निर्माण स्थल पर आमलोगों की जानकारी के लिए कोई बोर्ड भी नहीं लगाया गया है। जानकारी अनुसार जिले में नेशनल डेब्लपमेंट बैंक से सेतू विभाग को बड़े पुलो के निर्माण के लिए शासन से लगभग 24 करोड़ का पैकेज स्वीकृत हुआ था। जिले के विभिन्न विकासखंडों में 7 पुलो का निर्माण होना था जिसमे से एक पुल ग्राम सिंगारसत्ती की चकरार नदी में पिछले कई वर्ष से बन रहा है। पुल का कार्य प्रारंभ वर्ष 17-18 में किया गया था जिसकी पूर्णता अवधि वर्ष 20-21 तक थी। दो वर्ष अधिक समय बीत जाने के बाद भी पुल निर्माण कार्य अधर में लटका है। बताया जा रहा है कि पुल का निर्माण पिछले 6 माह से बंद पड़ा है। अधूरे पुल निर्माण को लेकर ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय अधिकारी और ठेकेदार की लापरवाही का खामियाजा उन्हे भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने पुल का कार्य शीघ्र प्रारंभ कराने की मांग की है।
इनका कहना है
फाइनेंसियल कारणों से कार्य को बीच में रोकना पड़ा। ठेकेदार पर पेनाल्टी भी लगाई जा रही है। मार्च 2024 तक कार्य पूर्ण हो जाएगा।
भूपेंद्र टेकाम, उपयंत्री