
Place box replaced by innocents in the hands of the bowl
डिंडोरी। मुख्यालय में वर्षों से मासूमों को अपने स्वार्थ के चलते उनके ही परिजन भीख मांगने को कहते है व उनके हाथों में भीख के लिए कटोरा थमा देते है। साथ ही उनके बदन पर मैले कुचले फटे पुराने कपड़ो को डाल कर भीख मांगने के लिए चलता कर देते है। इन मासूमों से सुबह से लेकर शाम तक भीख मंगवाने का काम करवाया जाता है। दिन भर लोगों से मिलने वाले भीख में पैसे व खाने के सामान को लेकर मासूम अपने परिजनों के सामने लाकर रख देते है। दिन भर कि मेहनत का फल (खाने की रोटी) भी सुकून से इन मासूमों को नसीब नही हो पाती। कभी ये नन्ही बच्चियॉं बिना कुछ खाये थक हार कर सो जाती है, तो कभी पैसों को लेकर उनके ही परिजन आपस में भिड़ पड़ते है। जिसका खामियाजा इन्हें भूखे रहकर चुकाना पड़ता है। एक बच्ची ने बताया कि उसके घर पर सभी लोग रहते है और हम सभी मिलकर भीख मांगने का काम करते हैं। जबकि इन बच्चियों के परिजनों को भीख मागते कभी कभी ही देखा जाता है। इन मासूमों की लालसा है कि वह भी अन्य बच्चों की तरह स्कूल जायें और पढाई करें लेकिन परिजनों के सामने इनकी एक नहीं चलती है। समाजसेवा का दंभ भरने वाली किसी स्वयंसेवी संस्था ने इन बच्चों के पुनर्वास की दिशा में कोई प्रयास नहीं किये हैं। नगर में दर्जनों बच्चे रोजाना सिर्फ भिक्षावृत्ति के लिये पहुंचते हैं। न मासूमों से सुबह से लेकर शाम तक भीख मंगवाने का काम करवाया जाता है। दिन भर लोगों से मिलने वाले भीख में पैसे व खाने के सामान को लेकर मासूम अपने परिजनों के सामने लाकर रख देते है।
बच्चियों के परिजनों को समझाईश दी जायेगी और अगर उनके द्वारा भीख मंगवाने का काम न करवाया जाये, यदि इसके बाद भी सुधार नहीं होगा तो उनके विरूद्ध सख्त कार्रवाई की जायेगी।
नागेन्द्र चौरसिया, अध्यक्ष बाल कल्याण समिति
Published on:
04 Aug 2018 05:06 pm
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