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पत्नी को पहले चलती कार से दिया था धक्का, फिर बैक कर चढ़ाई थी कार

पांच वर्ष पूर्व हुई हत्या का प्रभारी पुलिस अधीक्षक ने किया खुलासाघटना के बाद बेटे को अनूपपुर रेलवे स्टेशन में छोड़ आया था

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The wife was first pushed by a moving car, then the car was climbed back

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डिंडोरी. पांच वर्षीय बच्चे के बयान के आधार पर पुलिस ने पांच वर्ष पूर्व हुई हत्या की गुत्थी सुलझा ली है। मामले में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ के दौरान आरोपी ने पत्नी ही बेरहमी से हत्या करने व पांच वर्षीय बेटे को अनूपपुर रेलवे स्टेशन में छोडऩे की बात स्वीकार कर ली है। मामले का खुलासा करते हुए प्रभारी पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने बताया कि 15 दिसंबर 2016 को बरगी राजेन्द्रग्राम निवासी वृद्ध ने शिकायत दर्ज कराई थी कि बेटी 7 से 8 माह पूर्व राजेन्द्रग्राम निवासी प्रवीण गुप्ता के साथ पत्नी के रूप में डिंडोरी के हंसनगर में किराये के मकान में रह रही थी। पांच वर्षीय बेटा भी साथ में रहता था। बाद में जानकारी मिली कि नाती बाल कल्याण समिति बिलासपुर में मिला है। पीडि़त की शिकायत पर कोतवाली पुलिस ने गुम इंसान कायम कर पतासाजी की गई तो जांच के दौरान साक्षियों के कथन से यह बात सामने आई कि महिला 14 अप्रैल 2016 को अपने बेटे के साथ पति प्रवीण से मिलने की बात कहकर निकली थी जो वापस नहीं लौटी। महिला के बेटे ने बताया कि उसके पिता गाड़ासरई में सफेद कार लेकर आए थे। जिसमे वह अपनी मां के सांथ बैठ गया था। जहां से चलने के बाद रास्ते में उसके पिता ने मारकर फेंक दिया था। जिसे संज्ञान में लेते हुए थाना कोतवाली पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर मामले की विवेचना में जुट गई थी।
समाज में शादी की खबर लगने पर होता था विवाद
मामले में पुलिस ने आरोपी प्रवीण को अपनी हिरासत में लेकर पूछताछ की तो आरोपी ने अपनी पत्नी की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली। पुलिस पूछताछ में आरोपी प्रवीण ने बताया कि वह महिला को वर्ष 2009 से जानता था। वह उसे पत्नी बनाकर डिंडोरी के हंसनगर में किराए के मकान में रहने लगा था। वर्ष 2011 मे उनके एक पुत्र भी हुआ। इसी दौरान उसकी शादी समाज में तय हो गई। जिसकी जानकारी उसकी पत्नी को हो गई। इसी बात को लेकर उससे आए दिन झगड़ा होने लगा। उसने उसे समझाइश भी दी कि वह उसका पूरा ख्याल रखेगा। इसके बाद भी मानने तैयार नहीं थी। 22 अप्रैल 2016 को शादी तय होने के बाद 13 या 14 अप्रैल 2016 को एक बार पुन: समझाइश देने गाडासरई मिलने को बुलाया था। जहां से वह पत्नी और बेटे को समझाने की बात कह अमरकंटक लेकर गया। इसके बाद भी बात नहीं बनी तो उसे रास्ते से हटाने का सोच शहडोल से घुनघुटी के बीच सुनसान रास्ते पर सिद्ध बाबा घाट के पास चलती कार से पत्नी को धक्का दे दिया, फिर कार बैक कर उस पर चढ़ा दिया। इसके बाद भी गाड़ी से उतर कर जैक-राड से तब तक मारा जब तक उसने दम नही तोड़ दिया। पत्नी की मौत की बाद उसे खाई में फेंक दिया एवं बेटे को अमलाई रेलवे स्टेशन से ट्रेन में बैठाकर अनूपपुर ले गया। जहां चिप्स लेकर आने का बहाना कर रेलवे स्टेशन से बाहर आया और कार से वापस आ गया।
एसआईटी टीम को मिली सफलता
गुमशुदा की पतासाजी एवं आरोपी की गिरफ्तारी के लिए प्रभारी पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के निर्देशन व एसडीओपी रवि प्रकाश कोल के मार्गदर्शन में एसआईटी टीम का गठन किया गया था। जिसमे निरीक्षक सी के सिरामे, निरीक्षक धीरज राज, उपनिरीक्षक अनुराग जामदार, सउनि मुकेश बैरागी, प्रधान आरक्षक प्रवीण खम्परिया, कार्य प्रधान आरक्षक रूप सिंह, अभिमन्यु वर्मा व आरक्षक सुनील गुर्जर की टीम बनाई गई थी। इसके अलावा मामले के खुलासे में दर्शन, महादेव, अंकित मिश्रा, कृष्णपाल, कृष्ण कुमार, आरक्षक नीतीश दुबे व राघवेंद्र की भूमिका रही।

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