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गांव में न हैण्डपंप है न कुआं, झिरिया का पानी पीते है ग्रामीण

गंदा पानी पीने से बीमार हो रहे स्थानीय रहवासी

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There is no hand pump or well in the village, villagers drink water from Jhiriya

There is no hand pump or well in the village, villagers drink water from Jhiriya

डिंडोरी. जनपद पंचायत बजाग अंतर्गत ग्राम पंचायत पिपरिया के सेंदुरखार के रहवासी पीने के पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं। यहां के रहवासी नदी नाले का गंदा पानी पीने के लिए मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गंदा पानी पीने से लोग बीमार पड़ जाते हैं। जानकारी के अनुसार ग्राम के लोग हाथ से बनाई हुई झिरिया का पानी पीते हैं। गांव में न हैंडपंप है न ही कुआं बना है। पूरी गर्मी झिरिया का पानी पी कर बिता दिए अब बरसात में भी वही हाल होना है। ग्रामवासियों ने बताया कि जब से चेक डैम का निर्माण हुआ है तब से झिरया तक पानी लेने जाने में समस्या हो रही है। साथ ही चेक डैम बनने के बाद झिरिया में पानी का भराव कम होने से झिरिया का पानी गंदा हो जाता है फिर भी इसका पानी पीना लोगो की मजबूरी है। यहां के लोगों का कहना है कि शासन और प्रशासन हमारी ओर सालो से ध्यान नहीं दे रही है जबकि हम सालो से पीने के पानी के लिए परेशान है। झिरिया के पानी से अपना गुजारा करते हैं। जिसके लिए भी नाले को पार करके जाना पड़ता है और बरसात में ये संभव नहीं होने से परेशानी और अधिक बढ़ गई है।
अब बन रहे है दो सार्वजनिक कूप
जनपद पंचायत के उपयंत्री परमेश बेदीचार नेे बताया कि इस गांव तक पहुंचना बहुत कठिन है। जिसके चलते बोरिंग भी संभव नहीं होने से खनन नहीं हो सका है। साथ ही पथरीली जगह होने से कुएं खोदना भी मुश्किल होता है। इस सत्र में दो सार्वजनिक कूप निर्माण इस ग्राम में करवाए जा रहे है। जिनमे पानी की उपलब्धता भी है, लॉक डॉउन के चलते काम रुक गया नहीं तो अब तक कार्य पूर्ण हो गया होता। जिसके बाद यह उम्मीद जगी है कि ग्रामीणों को अपने गांव में आने वाले समय में शायद पीने का पानी उपलब्ध हो जावे। फिलहाल गांव में पेयजल को लेकर लोग हलकान है। और इतने सालों से इस विकराल समस्या का हल नहीं किया जाना मैदानी अमले की लापरवाही का उदाहरण है। ग्राम पंचायत के पास मनरेगा के तहत वर्षों से कूप निर्माण का विकल्प था फिर भी लोगों की समस्या पर ध्यान नहीं दिया जाना गंभीर है।