रोग और उपचार

शादी से पहले जरूर करवाए इस रोग की जांच, नहीं तो बाद में पड़ेगा पछताना!

अगर बात करें देश में थैलेसीमिया रोगियों की तो इस रोग से पीडि़त हर वर्ष करीब 10-12 हजार बच्चे जन्म लेते हैं। वहीं इसके वयस्क मरीजों की संख्या लाखों में है। दुनिया में सबसे अधिक थैलेसीमिया रोगी भारत में हैं। यह जन्मजात रोग दो प्रकार का होता है। मेजर और माइनर। जिन बच्चों में माइनर थैलेसीमिया होता है, वे लगभग स्वस्थ जीवन जीते हैं। जबकि जिनमें मेजर होता है।

2 min read
Jun 24, 2023

अगर बात करें देश में थैलेसीमिया रोगियों की तो इस रोग से पीडि़त हर वर्ष करीब 10-12 हजार बच्चे जन्म लेते हैं। वहीं इसके वयस्क मरीजों की संख्या लाखों में है। दुनिया में सबसे अधिक थैलेसीमिया रोगी भारत में हैं। यह जन्मजात रोग दो प्रकार का होता है। मेजर और माइनर। जिन बच्चों में माइनर थैलेसीमिया होता है, वे लगभग स्वस्थ जीवन जीते हैं। जबकि जिनमें मेजर होता है। उन्हें लगभग हर माह ब्लड की जरूरत पड़ती है।

थैलेसीमिया मुख्य रूप से खून से जुड़ी बीमारी है। इसमें बच्चे के शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं नहीं बनती हैं या यूं कहें कि इन कोशिकाओं की आयु भी बहुत कम हो जाती है। इसलिए इन रोगियों में बार-बार खून की जरूरत पड़ती है। इस रोग से पीडि़त बच्चों को विशेष देखभाल की जरूरत होती है।

ऐसे समझें बीमारी को
शरीर में सफेद व लाल रक्त कोशिकाएं होती हैं। थैलेसीमिया रोग में लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण उस गति से नहीं हो पाता जिस हिसाब से शरीर को आवश्यकता होती है। इसलिए ब्लड की जरूरत पड़ती है।

कारण
थैलेसीमिया एक वंशानुगत रोग है। अगर माता या पिता किसी एक में या दोनों में थैलेसीमिया के लक्षण है तो यह रोग बच्चे में हो सकता है। अगर माता-पिता दोनों को ही यह रोग है लेकिन दोनों में माइल्ड (कम घातक) है तो बच्चे को थैलेसीमिया होने की आशंका अधिक होती है। इसलिए अब शादी से पहले थैलेसीमिया जांच कराने केवन करीब 20 दिन रह जाता है।

Published on:
24 Jun 2023 03:13 pm
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