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uterine cancer: जानें पहली स्टेज में कैसे पहचानें गर्भाशय कैंसर के बारे में

Uterine Cancer: अन्य प्रकार के कैंसर की तुलना में इसके मामले ज्यादा होते हैं। 75% महिलाओं में मेनोपॉज के बाद और 10 % में 40% वर्ष से कम उम्र में यह हो सकता है।

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जयपुर

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Vikas Gupta

Jul 11, 2019

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Uterine Cancer: अन्य प्रकार के कैंसर की तुलना में इसके मामले ज्यादा होते हैं। 75% महिलाओं में मेनोपॉज के बाद और 10 % में 40% वर्ष से कम उम्र में यह हो सकता है।

Uterine Cancer: महिलाओं में होने वाले गर्भाशय के कैंसर को एंडोमेट्रिअल कार्सिनोमा कहते हैं। इसमें गर्भाशय की स्वस्थ कोशिकाएं अनियमित रूप से बढ़कर गांठ का रूप लेने लगती हैं जिनके कैंसर ग्रस्त होने की आशंका बढ़ती है। अन्य प्रकार के कैंसर की तुलना में इसके मामले ज्यादा होते हैं। 75% महिलाओं में मेनोपॉज के बाद और 10 % में 40% वर्ष से कम उम्र में यह हो सकता है।

लक्षण -
असामान्य रूप से जननांग से ब्लीडिंग या डिस्चार्ज, कुछ महिलाओं में मेनोपॉज से पहले या बाद में भी असामान्य रूप से रक्तस्त्राव होना। यूरिन के दौरान परेशानी व दर्द होना, पेट के निचले हिस्से और कूल्हों के आसपास दर्द जैसी परेशानियां होने लगती हैं।

कारण -
अधिक वजन, आनुवांशिकता, डायबिटीज या हाई बीपी से पीडि़त में रोग का खतरा रहता है। महिलाएं जिनके कोई बच्चा न हो, 55 साल की उम्र में मेनोपॉज हो, ब्रेस्ट कैंसर के इलाज के लिए टेमॉक्सिफेन दवा ले रही हों या जो पीसीओएस से पीड़ित हो, उनमें भी इसकी आशंका रहती है।

रोग का फैलाव -
गर्भाशय में ट्यूमर बनने से इसकी शुरुआत होती है। ज्यादातर मामलों में इस कैंसर की पहचान पहली स्टेज में ही हो जाती है। इस स्टेज में इलाज संभव है। लेकिन धीरे-धीरे ट्यूमर का फैलाव गर्भाशय के बाहर आसपास के अंगों की कोशिकाओं में होने लगता है। इसमें फेफड़े, लिवर, दिमाग, हड्डियां व जननांग शामिल हैं।

जांच : तीन स्तर पर लगाते हैं पता -
अल्ट्रासोनोग्राफी कर गांठ की मोटाई का पता लगाते हैं।
गांठ चार एमएम से ज्यादा मोटाई (मेनोपॉज के बाद) की हो तो एंडोमेट्रिअल बायोप्सी करते हैं।
एडवांस्ड स्टेज में कैंसरग्रस्त गांठ सुनिश्चित होने पर एमआरआई और सीटी स्कैन कर ट्यूमर के आकार और फैलाव को जांचते हैं।

इलाज-
प्रथम स्टेज में सर्जरी करते हैं। अधिक वजन या रोग से पीड़ित हैं तो रोबोटिक सर्जरी व लेप्रोस्कोपी करते हैं। रेडिएशन, कीमोथैरेपी और हार्मोन थैरेपी देते हैं।

ध्यान रखें -
खुद को एक्टिव बनाए रखना जरूरी है। इसके लिए भोजन में सब्जियां व फल खाएं। फिजिकली एक्टिव बने रहें। मार्केट के खाद्य पदार्थों से दूर ही रहें।

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