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Tiger:पखवाड़े भर पहले बाघ सुंदर की मौत अब बेटा सतपुड़ा भी चल बसा

मैत्रीबाग के सफेद बाघ सतपुड़ा की रविवार की सुबह 11 बजे मौत हो गई। महीनभर में मैत्रीबाग में सफेद बाघ की यह दूसरी मौत है।

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Satya Narayan Shukla

Aug 22, 2016

Tiger: A fortnight ago also died Satpura tiger bea

Tiger: A fortnight ago also died Satpura tiger beautiful son now dead

भिलाई.
मैत्रीबाग के सफेद बाघ सतपुड़ा की रविवार की सुबह 11 बजे मौत हो गई। महीनभर में मैत्रीबाग में सफेद बाघ की यह दूसरी मौत है। इससे पहले 2 अगस्त को सतपुड़ा के पिता सुंदर चल बसा। यह पहला मौका है, जब मैत्रीबाग में किसी सफेद बाघ की निर्धारित औसत उम्र से पहले मौत हुई है। सतपुड़ा का जन्म 8 अगस्त 2006 को मैत्रीबाग में ही हुआ था। उसकी उम्र महज 10 वर्ष थी। आमतौर पर सफेद बाघ की औसत आयु 14- 16 वर्ष होती है। बीएसपी का जनसंपर्क विभाग बाघ की मौत की वजह लंबे समय से बीमार रहना बता रहा है।


बीमारी का खुलासा नहीं किया

प्रबंधन ने इसके पहले कभी भी बाघ की बीमारी का खुलासा नहीं किया था। सतपुड़ा की पांच संतान हैं राधा, विशाखा, रघु, रंजन एवं रोमा। इनमें से रघु एवं राधा को मुकुंदपुर, जू सतना, विशाखा को लखनऊ जू एवं रजन को इंदौर जू एक्सचेंज के तहत भेजा गया। रविवार की देर शाम तक सतपुड़ा का अंतिम संस्कार नहीं किया जा सका था। डीएफओ की मौजूदगी में सोमवार को सुबह होने की संभावना है। इसके साथ अब मैत्रीबाग में सफेद बाघ की संख्या घटकर अब 8 ही रह गई है। इनमें 5 नर और 3 मादा शामिल हंै।


जू के मापदंड घोषित

सेंट्रल जू अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने वर्ष 2005-6 में जू के चार अलग-अलग दर्जे के लिए मापदंड घोषित किए। इसमें जू में मौजूद वन्य प्राणियों के प्रकार, संख्या, क्षेत्र व पर्यटकों की संख्या के संबंध में आंकड़े तय कर दिए गए। इन आंकड़ों में जो जू बैठता, उसे उसके मुताबिक दर्जा दिया गया। मैत्रीबाग जू क्षेत्र, वन्य प्राणियों के प्रकार और संख्या को देखते हुए, मीडियम से स्माल दर्जे पर आ गया था। प्रबंधन फिर से मीडियम दर्जे पर आने पुरजोर कोशिश कर रहा था।


घट रही बाघों की संख्या

इसके लिए 2008 से 10 के बीच 7 वन्य प्राणी एक्सचेंज किए। कम वन्य प्राणी देकर ज्यादा लाए गए, ताकि संख्या बढ़े। यहां जो वन्य प्राणी नहीं थे, वे लाए गए। इस दौरान ही मोर, गोल्डन पिजेंट, ब्लेक बक, नील गाय, स्याही, कबर बिज्जु व जंगली सुअर जैसे पक्षी व वन्य प्राणी जू में लाए गए हैं। वन्य प्राणियों के प्रकार व संख्या बढ़ाने के साथ ही प्रबंधन जवाहर उद्यान को जोड़कर क्षेत्रफल में भी बढ़ोत्तरी की। बाघों की लगातार मौत के बाद प्रबंधन के स्माल से मीडियम जू के दर्जे में आने के प्रयास को झटका लगा है।


मैत्रीबाग के सफेद बाघ

मैत्रीबाग में जन्मे एक सफेद बाघ भेजा गया लखनऊ जू। 2 सफेद बाघ भेजे गए राजकोट जू। एक सफेद बाघ इंदौर जू भेजा गया। 5 दिसंबर 15 को एक जोड़ा सफेद बाघ मुकुंदपुर, मध्यप्रदेश भेजा गया। इसी बीच 29 जून को बब्बर शेर नील की लकवाग्रस्त होने के बाद हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। 10 अप्रैल 16 को सफेद बाघिन कमला चल बसी।2 अगस्त 16 को सफेद बाघ सुंदर की मौत हो गई।


पेलीकॉन नहीं दे रहे अंडे

रूबी पेलीकॉन की संख्या पिछले चार वर्ष
से नहीं बढ़ी है। पहले 11 थे, घटकर अब 10 रह गए हैं। पेलीकॉन पिंजरे में
अंडे देती थी। केज को बढ़ाने के बाद से उसने अंडे देना ही बंद कर दिया है।
व्यवस्था में तब्दीली करके देखा गया, लेकिन उसका भी लाभ नहीं मिला।


ईमू का कुनबा नहीं बढ़ा

मैत्री
बाग में लोगों के आकर्षक का केंद्र ईमू बर्ड को एक्सचेंज के तहत लाया गया
था। ईमू बर्ड की संख्या 5 थी, ईमू बर्ड ने 17-17 अंडे दिए। जू प्रबंधन ने
कोशिश किया कि ईमू अंडों को खुद सुरक्षित बैठकर रखे, इसमें असफल रहे, जिससे
सभी अंडे खराब हो गए। ईमू बर्ड को जू प्रबंधन ने डार्क रूम उपलब्ध करवाने
के लिए एक कमरे का मरम्मत किया। उसके फर्श को पक्का बना दिया, जिसकी वजह से
ईमू बर्ड कमरे से बाहर ही अंडे देकर छोड़ देते थे। इस बीच मैत्री बाग में
एक ईमू बर्ड की मौत भी हो गई।

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