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जिला अस्पताल में मरीजों के साथ धोखा, किया था मिनरल का वादा और पिला रहे नॉर्मल वाटर

मरीजों को भोजन परोसने में महीनों से गड़बड़ी चल रही है पर ११ में से किसी डॉक्टर को यह दिखाई नहीं दिया।

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दुर्ग

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Dakshi Sahu

Sep 16, 2017

health

दुर्ग. जिला अस्पताल में मरीजों को गुणवत्तायुक्त ताजा भोजन मीनू के अनुसार मिल रहा है या नहीं इसकी निगरानी के लिए रोटेशन में ११ डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है। मरीजों को भोजन परोसने में महीनों से गड़बड़ी चल रही है पर ११ में से किसी डॉक्टर को यह दिखाई नहीं दिया। इससे यह साफ है कि या तो डॉक्टर निगरानी नहीं कर रहे हैं या फिर अनदेखी कर रहे हैं। इसी वजह से बिलासपुर की यह संस्था निर्धारित मीनू को एक कोने में रखकर मरीजों को अपनी मर्जी अनुसार भोजन परोस रहा है।

मरीजों को भोजन के साथ मिनरल वाटर भी नहीं दिया जा रहा है। जबकि मिनरल वाटर देने का बाकायदा अनुबंध हुआ है। कलेक्टर उमेश अग्रवाल ने कार्यभार ग्रहण करने के पंद्रह दिन बाद जिला अस्पताल का निरीक्षण किया था। उन्होंने भोजन व्यवस्था की जानकारी ली थी। मरीजों को मीनू के अनुसार पौष्टिक भोजन दिया जा रहा है या नहीं इसकी जांच करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद जिला अस्पताल प्रशासन ने २७ जून से लेकर ८ जुलाई तक भोजन की जांच करने के लिए रोटेशन में ११ डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई थी।

हर दिन 140 मरीजों व 60 प्रसूताओं को भोजन
जिला अस्पताल में हर दिन औसतन १४० इनडोर मरीजों को भोजन परोसा जा रहा है,जिसमें मीनू गायब है। इसी तरह हर रोज औसतन ६० प्रसूताओं भोजन दिया जा रहा है इसमें भी अनुबंध का पालन नहीं किया जा रहा है। अनुबंध के मुताबिक प्रसूताओं को डिब्बा बंद भोजन दिया जाना चाहिए पर ठेका संस्था ऐसी ही सामान्य भोजन दे रहा है।

इनकी ड्यूटी लगी थी जांच करने के लिए
डॉ. आरके देवागंन, डॉ. सरिता मिंज, डॉ. कोसरिया, डॉ. प्रफुल्ल जैन (वर्तमान में सेवानिवृत्त), डॉ. केडी तिवारी, डॉ. छाया तिवारी, डॉ. उज्जवला देवांगन, डॉ. एके साहू, डॉ. एसके पाल (वर्तमान बेमतेरा सीएस), डॉ.लाल मोहम्मद। सिविल सर्जन डॉ. केके जैन ने बताया कि भोजन परोसने वाले ठेकेदार को निर्देश दिया गया है कि वह भोजन को परोसने के पहले आरएमओ के पास जांच कराएं। अगर भोजन वितरण में खामियां है तो इसकी जांच करवाई जाएगी। रही महिला स्वसहायता समूह का कार्यक्षेत्र केवल बिलासपुर है तो इस विषय में मैं कुछ नहीं कहूंगा। टेंडर के माध्यम से कार्य दिया गया है।

डॉ. छाया तिवारी ने बताया कि
मुझे भोजन की जांच करने की जिम्मेदारी दी गई थी। एक दिन जांच करना था, लेकिन मै अवकाश पर चली गई। अवकाश से लौटने के बाद सीएमएचओ के रुप में कार्य करना शुरु कर दिया। इसलिए मुझे जानकारी नहीं है। डॉ. एके साहू ने बताया कि हां मैंने भोजन की जांच किया था। तब खाना बहुत स्वादिस्ट था। मरीजों से भी जानकारी ली थी। मरीजों ने खाना को बहुत अच्छा बताया। इसके बाद मैंनें इसकी जानकारी उच्च अधिकारियों को दी थी।

डॉ. एसके पाल ने बताया कि मुझे निर्देश मिला था उसका मैंने पालन किया। किचन में खाना बनाने से लेकर बनने के बाद चखा था। खाना अच्छा था। खाना जब मरीज को दिया जा रहा था तब मैंने उसे भी देखा। भोजन की व्यवस्था ठीक थी। डॉ. रजनीश मल्होत्रा ने बताया कि रोटेशन के तहत जिस दिन मुझे जांच करना था मैंने जांच किया। खाना का स्वाद भी लिया था। खाना मरीजों के लिहाज से तैयार किया गया था। जिस दिन मैंने खाना देखा उस दिन मीनू के हिसाब से बना था।