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तुलसी पत्ते के बिना क्यों अधूरी होती है भगवान विष्णु की पूजा, जानें वजह

तुलसी विवाह इस बार 20 नवंबर को है, जानें इसका महत्व और पूजन विधि
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नई दिल्ली

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Soma Roy

•

Updated: 18 Nov 2018, 9:27 AM IST

tulsi vivah 2018

तुलसी पत्ते के बिना क्यों अधूरी होती है भगवान विष्णु की पूजा, जानें वजह

नई दिल्ली। कार्तिक शुक्ल की एकादशी को तुलसी विवाह के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन तुलसी देवी की शादी शालिग्राम (पत्थर के रूप में विष्णु जी) से कराया जाता है। इस साल यह 20 नवंबर यानि यानि मंगलवार को है।

1.माता तुलसी और भगवान विष्णु का विवाह एकादशी के दिन होता है। यह दिवाली के 11वें दिन पड़ती है। इसे देवउठानी एकादशी भी कहते हैं।

2.इस दिन गंगा घाट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। इनमें महिलाओं की संख्या ज्यादा होती है। यहां महिलाएं डूबकी लगाने के बाद पूजा करती हैं।

3.भगवान विष्णु के पत्थर रूप में परिवर्तन होने की कथा बहुत दिलचस्प है। शास्त्रों के अनुसार भगवान विष्णु को देवी तुलसी ने श्राप दिया था क्योंकि उन्होंने उनका पति व्रत भंग किया था।

4.दरअसल तुलसी जी के पति जालंधर बहुत अत्याचारी थे। सभी लोग उसके उत्पाद से परेशान थे, लेकिन तुलसी के कहने पर भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया था कि जब तक तुलसी उनकी पूजा करेंगी, उनके पति को कोई नहीं मार सकेगा। मगर जालंधर के आतंक से लोगों को मुक्ति दिलाने एवं भगवान शिव के कहने पर विष्णु जी ने जालंधर का रूप धारण किया था और तुलसी का पति व्रत भंग कर दिया था।

5.अपने ही आराध्य के द्वारा छल किए जाने से माता तुलसी बहुत आहत थी। इसलिए उन्होंने भगवान विष्णु को पत्थर बन जाने का श्राप दे दिया था। उन्होंने कहा, बचपन से मैंने आपकी आराधना की है, लेकिन आपने मुझे धोखा दिया। आपने पत्थर जैसे व्यवहार किया इसलिए आप पत्थर के बन जाएं। इसी के चलते भगवान विष्णु का रंग काला हो गया था।

6.भगवान विष्णु के पत्थर बन जाने से पूरे संसार में त्राहि-त्राहि मच गई। तब माता लक्ष्मी ने तुलसी जी के चरण पकड़ लिए और उनसे उनके पति को क्षमा करने की प्रार्थना की। तब माता तुलसी ने लोक कल्याण के लिए अपना श्राप वापस ले लिया और विष्णु भगवान को पत्थर बनने से मुक्त कर दिया, लेकिन इसके बाद वह खुद अपने पति जालंधर के साथ सती हो गईं।

7.माता तुलसी की निष्ठा और पवित्रता भगवान विष्णु को प्रसन्न करती है। उन्होंने माता तुलसी के बलिदान और उनके शब्दों की गरिमा को व्यर्थ जानें नही दिया। विष्णु जी ने कहा कि अब उनका एक रूप शालिग्राम के तौर पर जाना जाएगा। जिसे माता तुलसी के साथ पूजा जाएगा।

8.तुलसी विवाह एकादशी के अगले दिन यानी कि द्वादशी के दिन होता है। द्वादशी मंगलवार 20 नवंबर 2018 को है। द्वादशी तिथि की शुरुआत 19 नवंबर को दोपहर 2:29 बजे से होगा। जो 20 नवंबर को दोपहर 2:40 बजे खत्म होगा।