7 नवंबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

9 महीने में सबसे कम हुअा देश में विदेशी मुद्रा भंडार

विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति में एक अरब डॉलर से ज्यादा की गिरावट के कारण देश का विदेशी मुद्रा भंडार 27 जुलाई को समाप्त सप्ताह में 95.09 करोड़ डॉलर घटकर साढ़े आठ माह के निचेल स्तर 404.19 अरब डॉलर पर आ गया।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

•

image

Saurabh Sharma

•

Updated: 3 Aug 2018, 10:33 PM IST

Forex

9 महीने में सबसे कम हुअा देश में विदेशी मुद्रा भंडार

नर्इ दिल्ली। पिछले कुछ दिनों से डाॅलर के मुकाबले रुपए में कमजोरी देखने को मिल रही है। उससे देश की स्थिति अंतर्राष्ट्रीय बाजार में काफी खस्ता हाेती जा रही है। जिसके कारण कर्इ आर्थिक एजेंसियों ने देश के विकास दर के कम होने का अनुमान लगाया है। वहीं दूसरी आेर पेट्रोल आैर डीजल के दाम भी बढ़ रहे हैं। इन दाे कारणों की वजह से देश में 9 महीने में विदेशी मुद्रा भंडार में सबसे बड़ी कमी देखने को मिली है।

विदेशी मुद्रा भंडार में आर्इ कमी
विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति में एक अरब डॉलर से ज्यादा की गिरावट के कारण देश का विदेशी मुद्रा भंडार 27 जुलाई को समाप्त सप्ताह में 95.09 करोड़ डॉलर घटकर साढ़े आठ माह के निचेल स्तर 404.19 अरब डॉलर पर आ गया। पिछले सात सप्ताह में से छह में इसमें गिरावट रही है।

पहले भी रह चुका है कम
इससे पहले 20 जुलाई को समाप्त सप्ताह हमें विदेशी मुद्रा भंडार 6.77 करोड़ डॉलर की बढ़त के साथ 405.14 अरब डॉलर पर रहा था। इसका इससे निचला स्तर 15 दिसंबर 2017 को समाप्त सप्ताह में 401.39 अरब डॉलर दर्ज किया गया था। रिजर्व बैंक के आज जारी आँकड़ों के अनुसार, 27 जुलाई को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा घटक विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति 1.01 अरब डॉलर घटकर 379.04 अरब डॉलर रह गया। इसका भी यह 15 दिसंबर 2017 के बाद का निचला स्तर है।

सोने के भंडार में बढ़ोत्तरी
स्वर्ण भंडार 6.11 करोड़ डॉलर बढ़कर 21.20 अरब डॉलर पर पहुंच गया। आलोच्य सप्ताह में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास आरक्षित निधि पांच लाख डॉलर बढ़कर 2.47 अरब डॉलर पर और विशेष आहरण अधिकार तीन लाख डॉलर घटकर 1.48 अरब डॉलर हो गया। यह भारत के लिए अच्छी खबर है। इससे भारत को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापार करने में आसानी होगी। लेकिन भारत सरकार को अपनी मुद्रा को लेकर गंभीरता से विचार करना होगा। ताकि विदेश मुद्रा भंडार में किसी तरह की कोर्इ कटौती ना हो सके।