
Arun Jaitley Raghuram Rajan
नई दिल्ली। बैंक की ब्याज दरें तय करने में अब सरकार की भी भूमिका होगी। सरकार ने मौद्रिक नीति समिति के गठन की दिशा में कदम बढ़ाते हुए सोमवार को इससे संबंधित एक अधिसूचना जारी की। रिजर्व बैंक के गर्वनर की अध्यक्षता वाली यह छह सदस्यीय समिति महंगाई को काबू रखने का लक्ष्य सामने रखकर ब्याज दरें तय करने का निर्णय करेगी। मौद्रिक नीति समिति में सरकार के तीन सदस्य शामिल होंगे।
RBI गवर्नर होंगे समिति के अध्यक्ष
वित्त मंत्रालय के अनुसार कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में एक समिति सरकार की ओर से नामित होने वाले सदस्यों की तलाश करेगी। ये सदस्य वित्तीय, आर्थिक और मौद्रिक मामलों के विशेषज्ञ होंगे और इनकी नियुक्ति चार साल के लिए की जाएगी। मंत्रालय के अनुसार आरबीआई गवर्नर समिति के अध्यक्ष होंगे। इसके अलावा दो अन्य सदस्य आरबीआई से ही होंगे। इनमें एक आरबीआई के डिप्टी गवर्नर तथा एक अन्य अधिकारी भी बतौर सदस्य समिति में शामिल होंगे।
मौद्रिक नीति के फैसलों में आएगी पारदर्शिता
वित्त मंत्रालय का कहना है कि समिति की साल भर में कम से कम चार बैठकें होंगी और हर बैठक के बाद उसके फैसलों को प्रचारित किया जाएगा। मंत्रालय का कहना है कि समिति आधारित तरीका अपनाने से मौद्रिक नीति के फैसलों में पारदर्शिता आएगी। सरकार ने रिजर्व बैंक कानून 1934 में संशोधन कर मौद्रिक नीति समिति के गठन का रास्ता साफ किया है।
गवर्नर से छिन जाएगा वीटो का अधिकार
मौद्रिक नीति समिति महंगाई का एक लक्ष्य तय कर, मुद्रास्फीति को उससे नीचे रखने के इरादे से ब्याज दरें तय करेगी। हालांकि समिति के अध्यक्ष को ब्याज दरें तय करने या किसी फैसले के संबंध में वीटो पावर हासिल नहीं होगी। एमपीसी के गठन के साथ ही ब्याज दरें तय करने का मौजूदा तरीका पूरी तरह बदल जाएगा। अभी आरबीआई की तरफ से गठित एक पैनल बेंचमार्क ब्याज दर तय करने की सिफारिश करता है लेकिन अंतिम फैसला आरबीआई गवर्नर का होता है।
यह भी तय है कि नई समिति के काम शुरू करने के साथ ही केंद्र की भूमिका महंगाई दर तय करने के साथ ही उस पर लगाम लगाने में भी बढ़ जाएगी। हालांकि यह भी तय है कि अब ब्याज दरों को लेकर वित्त मंत्रालय और आरबीआई के बीच कोई विवाद पैदा नहीं होगा।
Published on:
28 Jun 2016 03:16 pm

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