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जीएसटी काउंसिल की मीटिंग में व्‍यापारियों को बड़ी राहत, महीने में एक बार भरना होगा टैक्‍स

कंपोजीशन डीलर और शून्य लेन-देन वाले डीलर को छोड़ बाकी को हर महीने सिर्फ एक जीएसटी रिटर्न दाखिल करना होगा।
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Saurabh Sharma

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May 05, 2018

GST

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नई दिल्‍ली। 27वीं जीएसटी काउंसिल की मीटिंग में जिस तरह के फैसले की उम्‍मीद की जा रही थी वो तो नहीं हुए। लेकिन एक फैसले ने देश के लाखों रिटेल व्‍यापारियों को बड़ी रा‍हत दी है। यह राहत आगामी लोकसभा चुनाव और राज्‍यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में बीजेपी को काफी फायदा पहुंचा सकता है। जी हां, मीटिंग में व्‍यापारियों को राहत देते हुए महीने में एक बार जीएसटी भरने की मंजूरी दी गई है। यह प्रक्रिया अगने 6 महीने में लागू हो जाएगी।

व्‍यापारियों को राहत
बैठक के बाद वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि परिषद द्वारा मंजूर की गई सरलीकृत रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया में कंपोजीशन डीलर और शून्य लेन-देन वाले डीलर को छोड़ बाकी को हर महीने सिर्फ एक जीएसटी रिटर्न दाखिल करना होगा। कंपोजीशन डीलर व शून्य लेन-देन करने वाले डीलर हर तिमाही पर जीएसटी रिटर्न दाखिल करेंगे। इससे व्‍यापारियों को काफी फायदा होगा। क्‍योंकि मौजूदा समय में व्‍यापारियों को महीने में कई रिटर्न भरने होते हैं। जिससे उन्‍हें काफी तकलीफों का सामना पड़ता है। जिससे व्‍यापारियों का वक्‍त भी काफी बर्बाद हो जाता है।

पूरी तरह से सरकारी कंपनी होगी जीएसटीएन
वित्तमंत्री जेटली ने कहा, "जीएसटी परिषद ने जीएसटीएन संरचना के स्वामित्व में परिवर्तन पर विचार-विमर्श किया। मूल संरचना के अनुसार 49 फीसदी हिस्सेदरी सरकारी की है और 51 फीसदी अन्य कंपनियों की।" उन्होंने कहा, "मैंने सुझाव दिया कि 51 फीसदी हिस्सेदारी के साथ सरकार को स्वामित्व ग्रहण करना चाहिए और इसे राज्यों और केंद्र के बीच वितरित किया जाना चाहिए। इस प्रकार केंद्र सरकार के पास 50 फीसदी और राज्यों के पास सामूहिक रूप से 50 फीसदी हिस्सेदारी होनी चाहिए। इसमें राज्यों का अनुपात जीएसटी संग्रह के अनुसार तय होगा।" वर्तमान में केंद्र सरकार के पास 24.5 फीसदी और राज्य सरकारों के पास सामूहिक रूप से 24.5 फीसदी शेयर है जबकि बाकी 51 फीसदी गैर-सरकारी संस्थानों के पास है।