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हसीना डी. लिट की मानद उपाधि से सम्मानित

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना को शनिवार को काजी नजरुल यूनिवर्सिटी ने 'डॉक्टरेट ऑफ लिटरेचर' की मानद उपाधि प्रदान कर उन्हें सम्मानित किया।

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Jameel Ahmed Khan

May 27, 2018

Sheikh Hasina

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बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना को शनिवार को काजी नजरुल यूनिवर्सिटी ने 'डॉक्टरेट ऑफ लिटरेचर' की मानद उपाधि प्रदान कर उन्हें सम्मानित किया। यूनिवर्सिटी के कुलपति सधन चक्रवर्ती ने एक विशेष दीक्षांत समारोह के दौरान शेख हसीना को यह उपाधि प्रदान की। समारोह में हसीना के मंत्रिमंडल के कई मंत्री और पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी मौजूद थे।

राज्यपाल के. एन. त्रिपाठी की अनुपस्थिति में कुलपति ने दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की प्रधानमंत्री को यह सम्मान शोषण व असमानता से मुक्त लोकतांत्रिक समाज बनाने, महिलाओं को सशक्त करने, गरीबी दूर करने और सामाजिक व आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए दिया गया है क्योंकि ये सभी कवि काजी नजरुल इस्लाम के आदर्श थे।

हसीना ने इस सम्मान को सभी बंगालियों को समर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने समारोह में शामिल होने के लिए इसलिए अपनी सहमति जताई क्योंकि यूनिवर्सिटी का नाम बांग्लादेश के राष्ट्रकवि नजरुल के नाम पर रखा गया है। पश्चिम बंगाल में शनिवार को काजी नजरुल इस्लाम की 120वीं जयंती मनाई गई। बांग्लादेश में उनकी जयंती शुक्रवार को ही मनाई गई।

उन्होंने कहा, मुझे पूरी दुनिया के कई विश्वविद्यालयों से ऐसे अवार्ड प्राप्त करने के लिए आग्रह किया जाता है। लेकिन मुझे आजकल वहां जाने की फुर्सत नहीं है। हालांकि मुझसे इस कार्यक्रम में शामिल होकर मानद उपाधि ग्रहण करने का आग्रह किया गया तो मैं सिर्फ इसलिए सहमत हो गई क्योंकि इसका नाम नजरुल इस्लाम के नाम पर रखा गया है। यह हमारे पूरे देश के नागरिकों का सम्मान है। नजरुल वहां हर किसी के दिल में बसते हैं।

उन्होंने कहा, मैं पूरी विनम्रता के साथ आपके द्वारा प्रदत्त सम्मान स्वीकार करती हूं और इसे बांग्लादेश के लोगों और सभी बंगालियों को समर्पित करती हूं। नजरुल का जन्म अविभाजित बंगाल के आसनसोल सबडिवीजन के चुरुलिया में हुआ था। उन्होंने बंगाली में कविता और गाने समेत प्रचुर रचनाएं कीं। उनका निधन 1976 में बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हुआ।

औपनिवेशिक शासन के खिलाफ अपनी रचनाओं के लिए उन्हें विद्रोही कवि के रूप में याद किया जाता है। हसीना ने कहा कि बंगाल का विभाजन भले ही 1947 में हो गया मगर नजरुल और रवींद्रनाथ टैगोर (नोबेल पुरस्कार विजेता) दोनों बंगाल के कवि हैं। उनकी विरासत बांटी नहीं जा सकती है।