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स्कूल में अगर आपका बच्चा हुआ है बुलिंग का शिकार, तो ऐसे करें हैंडल

बुलिंग असल में एक ऐसी क्रिया है, जिसमें सामने वाले को हर्ट किया जाता है, उसे धमकी दी जाती है या फिर डराया जाता है।

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Amanpreet Kaur

Apr 16, 2018

bullying

bullying

बुलिंग को आमतौर पर लोग इतना संजीदगी से नहीं लेते, लेकिन कई केसेज में क्लासरूम बुलिंग के कारण बच्चों को डिप्रेशन का शिकार होते या फिर आत्महत्या के लिए प्रेरित होते देखा गया है। सातवीं कक्षा में पढऩे वाला नयन हंसमुख लेकिन शांतिप्रिय बच्चा है। उसे डांस करना और पढऩा बहुत पसंद है, हालांकि उसे आउटडोर गेम्स और कक्षा के शैतान बच्चे पसंद नहीं आते। कक्षा के कुछ बच्चों ने अचानक से उसे तंग करना शुरू कर दिया और लगातार तंग होने का नयन के व्यक्तित्व पर ऐसा असर पड़ा कि वह स्कूल जाने के नाम से डरने लगा, उसकी आंखों में हमेशा आंसू रहने लगे। इस स्थिति से उसे बाहर निकाला उसके पेरेंट्स ने। उन्होंने उसकी इन शैतान लडक़ों से निपटने में सहायता की और नयन का खोया आत्मविश्वास फिर से लौटाया।

क्या है बुलिंग

बुलिंग असल में एक ऐसी क्रिया है, जिसमें सामने वाले को हर्ट किया जाता है, उसे धमकी दी जाती है या फिर डराया जाता है। जो बच्चे बुुलिंग का शिकार होते हैं, उनका स्कूल का काम और सेहत बुरी तरह से प्रभावित होने लगती है। पेट में दर्द, डायरिया, कक्षा में ध्यान नहीं दे पाना, आत्मविश्वास की कमी, तनाव, अवसाद जैसी समस्याएं उनमें पैदा हो जाती हैं।

बुलिंग के प्रकार -

फिजिकल बुलिंग - इसमें लात-घूंसे मारना, हाथा-पाई करना, धक्का देना या किसी भी तरह से चोट पहुंचाना शामिल है।
वर्बल बुलिंग - दूसरों के सामने नाम बिगाडऩा, चिढ़ाना, आत्म विश्वास और आत्म सम्मान को चोट पहुंचाने वाली चीजें कहना।
सोशल बुलिंग - दूसरों को यह कहना कि इससे दोस्ती मत करो, यह अच्छा नहीं। इससे बुलिंग का शिकार बच्चा अकेलापन महसूस करता है।
साइबर बुलिंग - मोबाइल, ई-मेल्स, चैट रूम्स या सोशल नेटवर्किंग साइट्स के जरिए परेशान करने वाले मैसेज भेजना।

नहीं बताते

हमारे देश में हुए एक सर्वे के मुताबिक बुलिंग का शिकार होने वाले बच्चों में से 70 फीसदी इसका शिकार स्कूल में होते हैं लेकिन केवल 20 से 30 फीसदी बच्चे ही इसके बारे में घर में बताते हैं। वहीं ग्लोबल यूथ ऑनलाइन बिहेवियर सर्वे के मुताबिक हर 10 भारतीय बच्चों में से पांच ऑनलाइन बुलिंग के शिकार होते हैं। खास बात यह भी है कि सर्वे में यह सामने आया कि बच्चे इस मुद्दे पर अपने पेरेंट्स से बात भी करना चाहते हैं लेकिन केवल 29 फीसदी को ही सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलती है।

पेरेंट्स क्या करें

सबसे पहले आप अपने बच्चे को अपनी बात पूरी आजादी के साथ रखने का मौका दें। कभी उससे यह न कहें कि ‘तुमने मुझे पहले क्यों नहीं बताया?’ बच्चों की ड्रॉइंग-पेंटिंग पर ध्यान दें। बच्चे बड़े हैं तो आप उनसे अपने अनुभव शेयर करें। उन्हें कसकर गले लगाएं और वह भी देर तक।

बात करें

बच्चा ज्यादा परेशान है तो उसे काउंसलर, टीचर या दोस्त, जिससे भी उसे सपोर्ट मिल सके, मिलवाएं। बात करने से डर बाहर आता है। इसे उस चिढऩ से भी छुटकारा पाने में मदद मिलती है, जो बुलिंग का शिकार बच्चे के भीतर घर कर जाती है।

कौनसे बच्चे होते हैं बुलिंग का शिकार

अक्सर वे बच्चे बुलिंग का शिकार ज्यादा होते हैं, जो या तो कमजोर होते हैं या फिर कुछ अलग होते हैं। कई बार ईष्र्या के चलते भी, सीनियरटी दिखाने के चक्कर में भी बच्चे बुली के हत्थे चढ़ जाते हैं। इसके अलावा मोटे, शर्मीले या हमेशा चिंता में रहने वाले बच्चे भी बुलिंग का शिकार हो जाते हैं क्योंकि बुली चाहते हैं कि हर कोई उन पर फोकस रहे, इसलिए वे कमजोर बच्चों को निशाना बनाते हैं।

कैसे पहचानें बच्चा हो रहा है शिकार

- स्कूल जाने से इंकार या न जाने के बहाने बनाना।
- स्कूल के पहले या आने के बाद नाखुश या चिंतित दिखाई देना। दूसरों से ज्यादा से ज्यादा अलग-थलग रहने की कोशिश करना।
- स्कूल का रिजल्ट अचानक से गिर जाना।
- चीजें खोकर आना या फिर खराब करके लाना। शरीर पर चोट के निशान।
- व्यवहार में असामान्य रूप से बदलाव।
- सोने में परेशानी होना।
- आत्मविश्वास और आत्मसम्मान में कमी आना।

...कौन है बुली

लडक़ा या लडक़ी, कोई भी बुली हो सकता है। बुली अक्सर ऐसे बच्चे होते हैं, जो महत्वपूर्ण महसूस करना और करवाना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि वे बिना कुछ करे ही लोकप्रिय हो जाएं, सब उनसे डरें।

...बच्चा है शिकार तो

अगर आपका बच्चा बुलिंग का शिकार है तो सबसे पहले बच्चे को काउंसल करें। उसकी बातों को तवज्जो दें। याद रखिए बुलिंग का शिकार होना या खुद बुली होना, हमेशा गलत है।

क्या कर सकते हैं बच्चे

यह हर बच्चे का मूलभूत अधिकार है कि उसके साथ अच्छा व्यवहार हो। बुलिंग का शिकार होने वाले बच्चे मासूम होते हैं और इस तरह का व्यवहार डिजर्व नहीं करते। अगर आपका बच्चा बुलिंग का शिकार हो रहा है तो आपके लिए उसे कुछ खास सलाहें देना जरूरी है...

अकेले मत रहो

बच्चे को समझाएं कि वह अकेला रहने से बचे। उसे अपने दोस्तों और भरोसेमंद क्लासमेट्स के साथ ही रहने को कहें। खासकर जब बुलिंग की जा रही हो तो उसका ऐसा करना निहायत ही जरूरी है।

ध्यान मत दो

बच्चे से कहें कि वह चिढ़ाने वाले बच्चों पर ध्यान न दे और अपना काम करता रहे। असल में बुलीज बच्चे को डरता हुआ देखकर उसे और ज्यादा परेशान करते हैं। ऐसे में अगर उन्हें कोई प्रतिक्रिया न मिले तो उन्हें मजा नहीं आता और वे समझ जाते हैं कि इसे परेशान करने का कोई फायदा नहीं है।

गुस्से पर काबू

बुलीज जानना चाहते हैं कि उन्होंने आपकी भावनाओं पर अपना नियंत्रण कर रखा है या नहीं? वे आपको गुस्से में दांत पीसते हुए देखना चाहते हैं। ऐसे में कोई आपको चिढ़ाए तो गुस्सा न करें, बल्कि मुस्कुराते हुए निकल जाएं।

हाथापाई नहीं

बुलीज आपको चिढ़ा रहे हैं तो उनसे जाकर सीधे भिड़ न जाएं। आप दूसरे तरीके से भी उन्हें रोक सकते हैं। स्थिति अपने काबू में रखने के लिए आप वहां से बिना कोई ध्यान दिए निकल जाएं।

मजबूत बनाएं

बुलीज का सामना हमेशा अपने व्यवहार से करें। अपने बारे में अच्छा सोचने की प्रेक्टिस करें, बल्कि शुरुआत में ऐसा करना आपको बनावटी लगे लेकिन आप खुद पर भरोसा बनाएं रखें और आत्मविश्वास कम न होने दें।

बागडोर तुम्हारे हाथ

बच्चे को मार्शल आट्र्स सिखाएं, उसे योग का प्रशिक्षण दिलाएं। इससे उसके आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी। आत्मविश्वास में बढ़ोतरी का एक दूसरा तरीका शतरंज, संगीत, कम्प्यूटर्स, डांस सीखना भी है। इससे बच्चे के नए दोस्त भी बनेंगे और उसे अच्छा भी लगेगा।

स्कूल का रोल

स्कूल को बुली बच्चों के पेरेंट्स को बुलाकर उनसे पूछना चाहिए कि उसके इस तरह के व्यवहार का क्या कारण है। इसके अलावा बुली भी एक बच्चा है और शिकायत करने पर उसका भविष्य चौपट हो सकता है, यह स्कूल को बुली के पेरेंट्स को समझाना चाहिए।