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बीएचयू में अब पढ़ाया जाएगा प्राचीन काशी के मंदिरों, त्योहारों और सामाजिक यात्रा का पाठ

तैयारी : एकेडमिक काउंसिल में प्रस्ताव पास, अगले सत्र से शुरू किया जाएगा

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बीएचयू में अब पढ़ाया जाएगा प्राचीन काशी के मंदिरों, त्योहारों और सामाजिक यात्रा का पाठ

बीएचयू में अब पढ़ाया जाएगा प्राचीन काशी के मंदिरों, त्योहारों और सामाजिक यात्रा का पाठ

देश के प्रतिष्ठित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में अब विद्यार्थियों को उत्तर प्रदेश के प्राचीन शहर काशी (वाराणसी) के बारे में पढ़ाया जाएगा। 'काशी स्टडीज' को पीजी पाठ्यक्रम के तौर पर तैयार किया गया है। कोर्स अगले सत्र से शुरू किया जाएगा।काशी स्टडीज कोर्स में प्राचीन शहर के इतिहास, त्योहार, मेले, संस्कृति, धार्मिक महत्त्व, रहन-सहन, घाट, मंदिर, राजनीतिक और सामाजिक यात्रा के साथ स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को शामिल किया गया है। सोशल स्टडीज के पूर्व डीन प्रो. कौशल किशोर मिश्रा ने बताया कि हाल ही बीएचयू की एकेडमिक काउंसिल की बैठक में छह नए कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव पारित किया गया। इनमें 'काशी स्टडीज' शामिल है। यह इतिहास विभाग का सेल्फ फाइनेंस कोर्स है।

सेल्फ फाइनेंस कोर्स

काशी स्टडीज कोर्स तैयार करने में मुख्य भूमिका निभाने वाने प्रो. कौशल किशोर मिश्रा के मुताबिक एकेडमिक काउंसिल की ओर से अनुमोदित अन्य नए पाठ्यक्रमों में मालवीय अध्ययन, डायस्पोरा और वैश्विक अध्ययन, विज्ञान और विज्ञान नीति का इतिहास, एशियाई अध्ययन, अभिलेखीय अध्ययन के साथ प्रबंधन शामिल हैं। सभी कोर्स सेल्फ फाइनेंस होंगे।

वैश्विक स्तर पर महत्त्व बढ़ा

प्रो. मिश्रा ने कहा कि वैश्विक स्तर पर काशी का महत्त्व बढ़ा है। धार्मिक पर्यटन के केंद्र के रूप में भी इसके प्रति रुचि बढ़ी है। लोग काशी के बारे में जानना चाहते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए स्पेशलाइज्ड कोर्स के रूप में 'काशी स्टडीज' तैयार किया गया।