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Teachers Qualities And Roles: क्या आपके शिक्षक में नहीं हैं ये 5 गुण?

गुरुओं की हमारे जीवन में एक अहम भूमिका (Role Of Teacher In Students Life) होती है। ऐसे में आज हम जानेंगे ऐसे कुछ गुण जो एक शिक्षक में होने चाहिए। शिक्षक को अपने विषय के साथ-साथ सामान्य ज्ञान, इतिहास, भाषा का ज्ञान भी होना चाहिए। वहीं ज्ञान के अलावा एक अच्छे गुरु में ये 5 गुण भी होने चाहिए।
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जयपुर

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Shambhavi Shivani

•

Updated: 2 Mar 2024, 6:39 PM IST

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Teachers Qualities & Roles

नए साल के साथ ही नए शैक्षणिक सत्र (New Academic Session) की भी शुरुआत होने वाली है। ऐसे में स्कूलों में एडमिशन के साथ ही शिक्षकों की बहाली भी होगी। भारतीय परंपरा के अनुसार, गुरु का स्थान सबसे ऊपर होता है। कहते हैं, “गुरू ब्रह्मा गुरू विष्णु, गुरु देवो महेश्वरा गुरु साक्षात परब्रह्म, तस्मै श्री गुरुवे नम:” अर्थात गुरु ही ब्रह्मा है, गुरु ही विष्णु है और गुरु ही भगवान शंकर है। गुरु ही साक्षात परब्रह्म है। ऐसे गुरु को मैं प्रणाम करता हूं।


हमारी परंपराओं में गुरु को इतना सम्मान इसलिए दिया जाता है क्योंकि उन्हीं के मार्गदर्शन में हम एक बेहतर इंसान बनते हैं और शिक्षा प्राप्त करते हैं। गुरुओं की हमारे जीवन में एक अहम भूमिका (Role Of Teacher In Students Life) होती है। ऐसे में आज हम जानेंगे ऐसे कुछ गुण जो एक शिक्षक में होने चाहिए। शिक्षक को अपने विषय के साथ-साथ सामान्य ज्ञान, इतिहास, भाषा का ज्ञान भी होना चाहिए। वहीं ज्ञान के अलावा एक अच्छे गुरु में ये 5 गुण भी होने चाहिए।


गुरु को आदर्शवादी होना चाहिए अर्थात शिक्षकों को चरित्र का धनी होना चाहिए। छात्र अपने शिक्षक के साथ बहुत समय बीताते हैं। ऐसे में शिक्षकों के चरित्र का प्रभाव छात्रों पर भी पड़ता है।


कक्षा में शिक्षकों का व्यवहार अच्छा होना चाहिए। छोटे बच्चे अपने शिक्षकों के व्यवहार का अनुकरण करते हैं, इसलिए जरूरी है कि शिक्षक अच्छा उदाहरण पेश करें। शिक्षक का कक्षा व्यवहार कई कारकों द्वारा निर्धारित किया जाता है, जिसमें रवैया और योग्यता आदि शामिल है।


शिक्षकों का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य (Physical & Mental Health Of Teachers) अच्छा होना चाहिए। पढ़ाने का काम बहुत ही स्फूर्ति भरा होता है, ऐसे में बीमार या सुस्त शिक्षक अपना बेस्ट नहीं दे पाएंगे। साथ ही पढ़ाने के लिए मानसिक स्वास्थ्य का अच्छा होना भी जरूरी है।


शिक्षक को कक्षा में रहते हुए अपनी सोच और व्यवहार से संतुलित होना चाहिए। शिक्षक भविष्य निर्माण करते हैं। ऐसे में अगर वो कक्षा में किसी मुद्दे पर बहुत उग्र टिपण्णी करते हैं तो छात्रों पर इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा, यह उचित नहीं है। साथ ही शिक्षकों को किसी भी बच्चे के प्रति बहुत अधिक प्रेम और क्रोध दिखाने से बचना चाहिए। छात्र बुरा प्रदर्शन कर रहे हैं फिर भी संतुलित रहकर गुस्सा करें और छात्र बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं तब भी संतुलित रहकर प्यार लुटाएं।


एक शिक्षक पूरी कक्षा को अकेले संभालता है। कई बार तो अभिभावक भी अपने बच्चों को नहीं संभाल पाते हैं। लेकिन हर शिक्षक इसी चुनौती को रोज दिन बखूबी निभाता है। ऐसे में जरूरी है कि एक शिक्षक के भीतर नेतृत्व करने के गुण हों।