
Z Category(Image-Freepik)
Z Category Security: इसी साल फरवरी में रेखा गुप्ता ने दिल्ली की मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर बुधवार को उस समय हमला हुआ जब वह उत्तर दिल्ली के सिविल लाइंस स्थित अपने सरकारी आवास पर लोगों की शिकायतें सुन रही थीं। जनसुनवाई के दौरान एक व्यक्ति, जिसने खुद को शिकायतकर्ता के रूप में पेश किया, अचानक उन पर हमला करने लगा। हमलावर की पहचान राजेश भाई किमजी भाई साकारिया (41 वर्ष)* निवासी राजकोट, गुजरात के रूप में हुई है। मौके पर मौजूद पुलिस ने तुरंत उसे पकड़ लिया। घटना के कुछ घंटों बाद ही केंद्र सरकार ने रेखा गुप्ता की सुरक्षा को और कड़ा करते हुए दिल्ली पुलिस से सुरक्षा हटाकर इसे केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) को सौंप दिया। उन्हें Z कैटेगरी सिक्योरिटी कवर प्रदान किया जा रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि Z Category सुरक्षा में कौन और कितने जवान होते हैं, या उन्हें कितनी सैलरी मिलती है। आइए, डिटेल में जानते हैं।
भारत में सुरक्षा व्यवस्था को खतरे के स्तर के हिसाब से अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है। इनमें X, Y, Y+, Z और Z+ कैटेगरी शामिल हैं। इनमें Z श्रेणी तीसरे स्तर की उच्च सुरक्षा मानी जाती है। Z Category के अंतर्गत इस सुरक्षा घेरे में कुल लगभग 22 सुरक्षाकर्मी शामिल होते हैं। इनमें से 4 से 6 कमांडो नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) के होते हैं, जबकि बाकी पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान रहते हैं।सुरक्षा घेरे के तहत मुख्यमंत्री के आवागमन के समय उनके साथ बुलेटप्रूफ गाड़ियों का काफिला भी चलता है। उनके आवास, दफ्तर और यात्रा मार्ग पर तैनाती के लिए अतिरिक्त पुलिस बल भी लगाया जाता है। जरुरत के हिसाब से इस सुरक्षा श्रेणी में जवानों को लगाया जाता है।
लोगों के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि इतनी महंगी सुरक्षा व्यवस्था का खर्च कौन वहन करता है। इसको लेकर 2014 में दायर की गई एक आरटीआई के जवाब में केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया था कि ऐसे सुरक्षा घेरों का खर्च संबंधित राज्य सरकार को उठाना होता है। यानी अगर किसी मुख्यमंत्री या मंत्री को Z या Z+ कैटेगरी सुरक्षा दी जाती है तो इसका पूरा खर्च राज्य सरकार के बजट से आता है।
क्या आप जानते हैं कि किन्हें यह सुरक्षा मिलती है? देश में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को सबसे उच्च स्तर यानी SPG (स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप) की सुरक्षा मिलती है। इसके अलावा, केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों, सांसदों, जजों, नौकरशाहों, खिलाड़ियों, फिल्मी हस्तियों और संतों तक को उनके खतरे के आकलन के आधार पर अलग-अलग कैटेगरी की सुरक्षा दी जाती है। आम तौर पर राज्य के मुख्यमंत्रियों को Z श्रेणी की सुरक्षा दी जाती है।
Z श्रेणी सुरक्षा में शामिल NSG कमांडो और अन्य बलों के जवानों को उनके पदानुसार वेतन मिलता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Z श्रेणी सुरक्षा में महानिदेशक (DG) को प्रतिमाह लगभग 2 लाख से 3 लाख रुपये तक वेतन मिलता है, जबकि डिप्टी इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों को करीब 1.25 लाख से 1.35 लाख रुपये मासिक वेतन दिया जाता है।
Published on:
21 Aug 2025 04:03 pm
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