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गुप्त नवरात्र 2020, आज से: जानिये पूजा विधि और क्या है खास इस बार

: आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्र 22 जून से 30 जून तक
: एक ही दिन पड़ेंगी ये दो तिथियां

भोपाल

Updated: June 21, 2020 09:40:21 pm

हिन्दू धर्म में मां दुर्गा को शक्ति का प्रतीक माना जाता है। देवी दुर्गा को पूजने के लिए लोग साल में चार बार नवरात्रि मनाते हैं। इन चार नवरात्रियों में दो नवरात्रि उदय नवरात्रि होती है जबकि दो गुप्त नवरात्रि gupt navratra 2020 होती है। उत्तर भारत के ज्यादातर जगहों पर मनाई जाती है।

Ashad Gupt Navratri 2020 Festival became special due to surya grahan
Ashad Gupt Navratri 2020 Festival became special due to surya grahan

इस नव वर्ष यानि 2077 संवत्सर में आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्र 21 जून को पड़ने वाले सूर्य ग्रहण के ठीक अगले दिन यानि 22 जून से शुरू हो रहे हैं। गुप्त नवरात्र में साधक गुप्त विद्या के साथ ही गोपनीय शक्तियों का भी आह्वान कर उन्हें प्राप्त करते हैं।

गुप्त नवरात्रि gupt navratri की प्रमुख देवियां...
गुप्त नवरात्र के दौरान कई साधक महाविद्या (तंत्र साधना) के लिए मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा करते हैं।

पंचमी व षष्ठी तिथि एक ही दिन...
पंडित सुनील शर्मा के अनुसार आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि gupt navratra का प्रारंभ आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा 22 जून 2020 से हो रहा है। वहीं इस बार पंचमी व षष्ठी तिथि एक ही दिन पड़ने के कारण इस बार नवरात्र 8 दिनों का ही रहेगा।

दरअसल 22 जून को प्रतिपदा के साथ शुरु होने वाले इस पर्व की नवमी 29 जून को पड़ रही है वहीं 30 जून का दशमी, वहीं 26 जून 2020 यानि शुक्रवार को आषाढ़ शुक्ल पंचमी व षष्ठी दोनों पड़ रही है, इसमें भी पंचमी तिथि 11.26 तक रहेगी। जिसके बाद षष्ठी शुरू हो जाएगी।

गुप्त नवरात्रि में प्रलय एवं संहार के देव महादेव एवं मां काली की पूजा का भी विधान है। गुप्त नवरात्रि gupt navratri 2020 में साधक गुप्त सिद्धियों को अंजाम देते हैं और चमत्कारी शक्तियों के स्वामी बन जाते हैं।

सनातन धर्म में कोई भी धार्मिक कार्य आरंभ करने से पूर्व कलश स्थापना करने का विधान है। पृथ्वी को कलश का रूप माना जाता है तत्पश्चात कलश में उल्लिखित देवी- देवताओं का आवाहन कर उन्हें विराजित किया जाता है। इससे कलश में सभी ग्रहों, नक्षत्रों एवं तीर्थों का निवास हो जाता है।

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कलश स्थापना के उपरांत कोई भी शुभ काम करें वह देवी-देवताओं के आशीर्वाद से निश्चिंत रूप से सफल होता है।

पूजा विधि... puja vidhi of gupt navratra
प्रथम गुप्त नवरात्रि gupt navratra में दुर्गा पूजा का आरंभ करने से पूर्व कलश स्थापना करने का विधान है। जिससे मां दुर्गा का पूजन बिना किसी विध्न के कुशलता पूर्वक संपन्न हो और मां अपनी कृपा बनाएं रखें।

कलश स्थापना के उपरांत मां दुर्गा का श्री रूप या चित्रपट लाल रंग के पाटे पर सजाएं। फिर उनके बाएं ओर गौरी पुत्र श्री गणेश का श्री रूप या चित्रपट विराजित करें।

पूजा स्थान की उत्तर-पूर्व दिशा में धरती माता पर सात तरह के अनाज, पवित्र नदी की रेत और जौं डालें। कलश में गंगाजल, लौंग, इलायची, पान, सुपारी, रोली, मौली, चंदन, अक्षत, हल्दी, सिक्का, पुष्पादि डालें।

जौ अथवा कच्चे चावल कटोरी में भरकर कलश के ऊपर रखें उसके बीच नए लाल कपड़े से लिपटा हुआ पानी वाला नारियल अपने मस्तक से लगा कर प्रणाम करते हुए रेत पर कलश विराजित करें।

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अखंड ज्योति प्रज्जवलित करें जो पूरे नौ दिनों तक जलती रहनी चाहिए। विधि-विधान से पूजन किए जानें से अधिक मां दुर्गा भावों से पूजन किए जाने पर अधिक प्रसन्न होती हैं।

अगर आप मंत्रों से अनजान हैं तो केवल पूजन करते समय दुर्गा सप्तशती में दिए गए नवार्ण मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे' से समस्त पूजन सामग्री अर्पित करें। मां शक्ति का यह मंत्र चमत्कारी शक्तियों से सपंन्न करने में समर्थ है।

अपनी सामर्थ्य के अनुसार पूजन सामग्री लाएं और प्रेम भाव से पूजन करें। संभव हो तो श्रृंगार का सामान, नारियल और चुनरी अवश्य अर्पित करें। नौ दिन श्रद्धा भाव से ब्रह्म मुहूर्त में और संध्याकाल में सपरिवार आरती करें और अंत में क्षमा प्रार्थना अवश्य करें।

2020 गुप्त नवरात्रि : 2020 gupt navratra
इस साल आषाढ़ माह में गुप्त नवरात्रि 22 जून से शुरू हो रही है। जो 30 जून तक चलेगी। 30 जून को ही नवरात्रि का पारण होगा। 22 जून दिन सोमवार से शुरू होने वाली इस गुप्त नवरात्रि के नौ दिन देवी दुर्गा के 9 अलग-अलग रूपों की पूजा होती है।

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तंत्र साधना का महत्व
गुप्त नवरात्रि gupt navratra की पूजा मां दुर्गा की उपासना के साथ तंत्र साधना के लिए भी जानी जाती है। इस गुप्त नवरात्रि में भी लोग व्रत-पूजा, उपवास आदि करते हैं। लोग इसमें दुर्गा सप्तशती का पाठ, दुर्गा चालीसा, दुर्गा सहस्त्रनाम का पाठ लाभकारी माना जाता है।

दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति
साल के दो प्रमुख नवरात्रि में जिस प्रकार देवी के नौ रूपों की पूजा होती है। उसी तरह गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की साधना होती है।

देवी भागवत के अनुसार जिस तरह वर्ष में चार बार नवरात्र आते हैं और जिस प्रकार नवरात्रि में देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है, ठीक उसी प्रकार गुप्त नवरात्र में दस महाविद्याओं की साधना की जाती है।

गुप्त नवरात्रि विशेषकर तांत्रिक क्रियाएं, शक्ति साधना, महाकाल आदि से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्त्व रखती है। इस दौरान देवी भगवती के साधक बेहद कड़े नियम के साथ व्रत और साधना करते हैं। इस दौरान लोग लंबी साधना कर दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति करने का प्रयास करते हैं।

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गुप्त नवरात्रि की प्रमुख देवियां
गुप्त नवरात्र gupt navratra के दौरान कई साधक महाविद्या (तंत्र साधना) के लिए मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा करते हैं।

10 महाविद्याओं की होती है साधना
गुप्त नवरात्रि gupt navratri में भी उदय नवरात्रि की ही तरह ही कलश की स्थापना की जाती है। नौ दिन तक व्रत का संकल्प लेकर प्रतिदिन सुबह-शाम मां दुर्गा की अराधना इस दौरान की जाती है। साथ ही अष्टमी या नवमी के दिन कन्याओं के पूजन के साथ व्रत की समाप्ति होती है। तंत्र साधना करने वाले इस दौरान माता के 10 महाविद्याओं की साधना करते हैं।

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- नौ दिनों तक ब्रह्मचर्य नियम का जरूर पालन करें।
- तामसी भोजन का त्याग करें।

- कुश की चटाई पर शैया करनी चाहिए।

- निर्जला अथवा फलाहार उपवास रखें।

- मां की पूजा-उपासना करें।

- लहसुन-प्याज का उपयोग न करें।

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