
सियासत: अचानक चर्चा में आई गुमनाम राजनीतिक पार्टी, नए राजनीतिक ठिकाने के रूप में उभरी एनसीपीआई
तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़े असंतोष और संगठनात्मक खींचतान के बीच नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) पहली बार मुख्यधारा की राजनीति में चर्चा का विषय बन गई है। अब तक राष्ट्रीय या राज्य स्तर की राजनीति में पार्टी की पहचान नहीं बन पाई थी, लेकिन तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के इससे जुड़ने की चर्चाओं ने इस छोटे राजनीतिक दल को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। लोकसभा में अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रहे तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों के लिए यह पार्टी एक नए राजनीतिक ठिकाने के रूप में उभरी है।
अब यह कम चर्चित पार्टी लोकसभा में 20 सांसदों वाली पार्टी बनने जा रही है। तृणमूल के बागी गुट के एनसीपीआई में विलय के ऐलान के साथ अपने अधिकारों की रक्षा के लिए दलबदलुओं को नकारें के नारे के साथ 2023 में त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में गुमनामी के बीच चुनाव लड़ने वाला राजनीतिक दल राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आ गया है। हैरानी की बात यह है कि इस पार्टी का कोई भी उम्मीदवार अब तक विधानसभा चुनाव नहीं जीता है। अगर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने मंजूरी दे दी तो यह पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना लेगी, जबकि दो दिन पहले तक किसी को यह भी नहीं पता था कि इस नाम की कोई पार्टी भी है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, एनसीपीआई ने वर्ष 2022 में अपने गठन की सार्वजनिक घोषणा की थी। 13 अक्टूबर 2022 को एक अंग्रेजी समाचार पत्र और एक हिंदी दैनिक में प्रकाशित विज्ञापन के जरिए पार्टी ने अपने गठन, उद्देश्य और संगठनात्मक ढांचे की जानकारी दी थी। विज्ञापन में कहा गया था कि यदि किसी व्यक्ति या संगठन को पार्टी के नाम या गठन पर आपत्ति हो तो वह 30 दिन के भीतर चुनाव आयोग को अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है। यह पार्टी 2023 में रजिस्टर्ड हुई थी और उसी साल त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार उतारे थे। पार्टी का पंजीकृत कार्यालय पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के बांकरा क्षेत्र के नटपाड़ा गांव में स्थित है। एनसीपीआई को एक रजिस्टर्ड अनरिकॉग्नाइज्ड पॉलिटिकल पार्टी के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में टीएमसी के 20 सांसदों के विलय पर पार्टी के फाउंडर और नेशनल ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी शांतनु डे ने कहा, हमारी पार्टी के लीडर्स की एक ऑनलाइन मीटिंग हुई और हमने इसका स्वागत किया। पार्टी 2023 में रजिस्टर हुई थी।हमने त्रिपुरा में एनडीए को सपोर्ट किया था। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने कुछ सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन कोई उल्लेखनीय सफलता हासिल नहीं कर सकी। दोनों उम्मीदवार मिलाकर भी 1,000 वोट नहीं जुटा सके थे।
त्रिपुरा विधानसभा चुनाव के पोस्टरों में पार्टी के उपाध्यक्ष के रूप में दिखाए गए उत्तिया कुंडू ने 13 मई को अपने फेसबुक पेज पर सुवेंदु अधिकारी के साथ एक तस्वीर साझा की थी। बांग्ला में लिखे कैप्शन में कहा गया था, सिर्फ सपने देखने के दिन खत्म हो गए हैं, अब उन्हें सच करने का समय है। बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में सुवेंदु अधिकारी की जीत की यात्रा शुभ हो। आपके संकल्प से बंगाल की हर धूल फिर से जीवंत हो। 10 जून को, यानी विलय से चार दिन पहले, उत्तिया ने फेसबुक पर रहस्यमय पोस्ट साझा किया, इसमें ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की तस्वीरें थीं। पोस्ट में लिखा था, अहंकार पतन का कारण बनता है। सत्ता के नशे में लोग अक्सर भूल जाते हैं कि सत्ता स्थायी नहीं होती और जनता का समर्थन ही असली ताकत है, जो आज शिखर पर हैं, उन्हें कल समय को जवाब देना होगा।
इस पर तृणमूल सांसद सौगत रॉय ने कहा, यह दुख की बात है। पार्टी सांसद एक अनजान पार्टी में शामिल हो गए हैं। उन्होंने अपनी इज्जत खो दी है, मैं क्या कह सकता हूं? एनसीपीआई तो कोई जानी-मानी पार्टी भी नहीं है। यह बंगाल में रजिस्टर्ड है लेकिन इसने त्रिपुरा में कैंडिडेट दिया।
Published on:
15 Jun 2026 09:02 pm
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