धूमावती जयंती: इस विधि से करें देवी के इस स्वरूप की पूजा, मनोवांछित फल की होगी प्राप्ति

इस विधि से करें देवी के इस स्वरूप की पूजा, मनोवांछित फल की होगी प्राप्ति

By: Tanvi

Published: 09 Jun 2019, 04:14 PM IST

हर साल ज्योष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी के दिन मां धूमावती जयंती मनाई जाती है। इस अवसर पर 10 महाविद्या की पूजा की जाती है और मां का आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। इस साल धूमावती जयंती 10 जून को मनाई जाएगी। धूमावती जयंती के दिन सामूहिक व्रत अनुष्ठान, धूमावती देवी स्त्रोत पाठ व विशेष मंत्रों का जप भी किया जाता है।

कहा जाता है की धूमावती के दर्शन करने से शत्रुओं से मां रक्षा करती है और आपके शत्रु आपका कुछ नहीं बिगाड़ पाते हैं। इस दिन विशेषकर काले तिल को काले वस्त्र में बांधकर मां धूमावती को चढ़ाने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मां अपने भक्तों के सभी कष्टों को हर लेती हैं। लेकिन देवी पार्वती के इस स्वरूप को लेकर एक मान्यता है कि इस दिन सुहागिन महिलाएं मां धूमावती का पूजन नहीं करती हैं, बस दूर से ही देवी के दर्शन करती हैं।

 

dhoomavati jayanti

ऐसे करें मां का पूजन:

धूमावती जयंती के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर पूजास्थल को गंगाजल से पवित्र करके जल, पुष्प, सिन्दूर, कुमकुम, अक्षत, फल, धूप, दीप तथा नैवैद्य आदि से मां का पूजन करें। इस दिन मां धूमावती की कथा भी सुनना चाहिए। पूजा के पश्चात अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए मां से प्रार्थना जरूर करनी चाहिए, क्योंकि मां धूमावती की कृपा से मनुष्य के समस्त पापों का नाश होता है और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

धूमावती जयंती के दिन मां की विशेष कृपा पाने के लिए इन मंत्रों का रुद्राक्ष माला से 108 बार, 21 या 51 माला का जाप करें:

ॐ धूं धूं धूमावत्यै फट्।।
धूं धूं धूमावती ठ: ठ:।

मां धूमावती का तांत्रोक्त मंत्र

1. धूम्रा मतिव सतिव पूर्णात सा सायुग्मे।
सौभाग्यदात्री सदैव करुणामयि:।।

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