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Papankusha Ekadashi 2019: उपवास रखने से हजार अश्वमेध यज्ञों का मिलता है फल

Papankusha Ekadashi Vrat : इस साल 2019 में पापाकुंशा एकादशी तिथि 9 अक्टूबर 2019 दिन बुधवार को है। जानें पापाकुंशा एकादशी व्रत का महत्व और शुभफल।

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भोपाल

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Shyam Kishor

Oct 08, 2019

पापाकुंशा एकादशी 9 अक्टूबर 2019 : हजार अश्वमेध यज्ञों का मिलता है फल इस दिन उपवास रखने से

पापाकुंशा एकादशी 9 अक्टूबर 2019 : हजार अश्वमेध यज्ञों का मिलता है फल इस दिन उपवास रखने से

आश्विन मास की शारदीय नवरात्रि के व्रत खत्म होने के अकले दिन दशहरा और उसके बाद आश्विन माह की सबसे महत्वपूर्ण तिथि भी आती जिसे पापाकुंशा एकादशी कहा जाता है, इस दिन व्रत उपवास पूरी श्रद्धा विश्वास के साथ करने से कर्ता को एक हजार अश्वमेध यज्ञ एवं सूर्य यज्ञ का फल स्वतः ही मिल जाता है। इस साल 2019 में पापाकुंशा एकादशी तिथि 9 अक्टूबर 2019 दिन बुधवार को है। जानें पापाकुंशा एकादशी व्रत का महत्व और शुभफल।

9 अक्टूबर 2019 बुधवार को है पापाकुंशा एकादशी व्रत

शास्त्रों के अनुसार, आश्विन माह के शुक्ल पक्ष में नवरात्र के समाप्त होने के बाद जो एकादशी तिथि आती उसे पापाकुंशा एकादशी कहा जाता है। Papankusha Ekadashi के दिन मनोवांछित फल कि प्राप्ति के लिये भगवान श्री विष्णु की पूजा की जाती है, यह एकादशी इस साल 9 अक्टूबर 2019 बुधवार के दिन है। इस पापाकुंशा एकादशी का व्रत रखने और भगवान विष्णु जी की पूजा करने से व्यक्ति को स्वर्ग लोक तक की प्राप्ति हो जाती है।

हजार अश्वमेघ और सौ सूर्ययज्ञ का फल मिलता है

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी की पापाकुंशा एकादशी हजार अश्वमेघ और सौ सूर्ययज्ञ करने के समान फल प्रदान करने वाली होती है। ऐसा माना जाता हैं कि इस Papankusha Ekadashi एकादशी व्रत के समान अन्य कोई दूसरा व्रत नहीं है। जो व्यक्ति इस एकादशी व्रत करके रात्रि में जागरण करता है वह स्वर्ग का अधिकारी स्वतः बन जाता जाता है। अगर कोई इन दिन दान करता हो तो उसे अनेक शुभ फलों की प्राप्ति होती है।

पापाकुंशा एकादशी का व्रत ऐसे करें

इस एकादशी व्रत में भगवान श्री विष्णु जी का विशेष पूजन धूप, दीप, नारियल, पुष्प, केले, और पंचामृत से किया जाता है। Papankusha Ekadashi एकादशी तिथि के दिन ब्राह्ममुहूर्त उठकर गंगाजल मिले जल से स्नान करने के बाद पूजा स्थल में बैठकर व्रत करने का संकल्प लेते हुए कलश स्थापना कर घी का एक दीपक जलाने के बाद भगवान श्री विष्णु जी की विशेष पूजा आराधना करें। करते करने वाले विष्णु के सहस्त्रनाम का पाठ अवश्य करें। व्रत समाप्त होने के बाद दूसरे दिन द्वादशी तिथि को किसी योग्य सतपथी ब्राहाम्ण या जरूरत मंद गरीबों को भोजन करायें।

पापांकुशा एकादशी व्रत में यथासंभव सामर्थयानुसार दान व दक्षिणा आदि दने से व्यक्ति समस्त पापों से छुटकारा प्राप्त कर लेता है। शास्त्रों में एकादशी के बारे में कहा गया है कि इस दिन उपवास रखने से पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। यह एकादशी जीवों के परम लक्ष्य, भगवद भक्ति, को प्राप्त करने में सहायक होती है।

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