
वासुदेव द्वादशी 13 जुलाई : ऐसे करें भगवान श्रीकृष्ण एवं माँ लक्ष्मी की पूजा, सारे मनोरथ होंगे पूरे
आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को वासुदेव द्वादशी ( Vasudev dwadshi ) पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस विशेष रूप में भगवान श्रीकृष्ण एवं मां लक्ष्मी का पूजन किया जाता है। इस दिन व्रत रखने के बहुत लाभ है, पूर्व में हुए ज्ञात-अज्ञात पापों का नाश हो जाता है। निसंतानों को संतान की प्राप्ति हो जाती है। इस साल 13 जुलाई शनिवार 2019 को मनाया जायेगा वासुदेव द्वादशी पर्व। जानें वासुदेव द्वादशी के दिन कैसे करें पूजन और क्या है इसका महत्व।
वासुदेव की पैर से लेकर सिर तक होती है पूजा
अषाढ़ महीने में मनाई जाने वाली वासुदेव द्वादशी के दिन भगवान वासुदेव की पूजा, उनके व्यूहों के साथ पैर से लेकर सिर तक के सभी अंगों तक की जाती है। साथ इस दिन भगवान वासुदेव के विभिन्न नामों का जप या पाठ करने से अनेक मनोकामनाएं पूरी होने लगती है। इस दिन जो भी व्रत रखता है उसके सारे पाप खत्म हो जाते हैं। संतान प्राप्ति की इच्छा वाले को संतान सुख प्राप्त होता है। नष्ट हुआ राज्य इस दिन व्रत रखने से पुनः वापस मिल जाता है। यही रहस्य देवर्षि नारद ने भगवान वासुदेव और माता देवकी जी को बताया था।
इस दिन माँ लक्ष्मी का ऐसे करें पूजन
वासुदेव द्वादशी के दिन भगवान श्रीकृष्ण के साथ विशेष रूप से माँ लक्ष्मी का पूजन करने का विधान भी है। इस दिन व्रत रखकर दोनों संध्याओं में कमल के पुष्पों के द्वारा षोडषोपचार विधि से माँ लक्ष्मी का पूजन कर- लक्ष्मी मंत्रों का जप कम से कम एक हजार बार करना चाहिए।
भगवान श्रीकृष्ण का ऐसे पूजन करें
वासुदेव द्वादशी के दिन प्रात: जल्द स्नान करके श्वेत वस्त्र धारण कर भगवान श्रीकृष्ण का सोलह प्रकार के पदार्थों से पूजन करना चाहिए। इस दिन भगवान को हाथ का पंखा और फल-फूल विशेष रूप से चढ़ानें चाहिए। पंचामृत भोग लगाना चाहिए। इस दिन भगवान विष्णु के सहस्त्रनामों का जप करने से हर तरह के कष्ट दूर हो जाते हैं। इस दिन गरीब जरूरत मंदों को कुछ न कुछ दान जरूर करना चाहिए।
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Published on:
12 Jul 2019 04:25 pm
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