
रायपुर . केंद्र सरकार द्वारा लाए गए 3 कृषि कानून बिल का विरोध कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा के नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि सरकार 22 जनवरी के बाद से कोई बातचीत नहीं कर रही है। वे सशर्त बातचीत चाहते हैं, जो संभव नहीं है। हां, अगर केंद्र सरकार किसी एक मंत्री को फुल फ्लैश पावर देकर बातचीत के लिए नियुक्ति करती है तो हम तैयार हैं। 'पत्रिका' के सवाल पर टिकैत ने कहा कि हमारी प्रधानमंत्री से मुलाकात या बातचीत की कोई मंशा नहीं है। किसानों की प्रमुख मांग है कि सरकार बिल वापस ले। सभी फसलों की एमएसपी तय करे।
बुधवार को राकेश टिकैत ने मोर्चा के पदाधिकारियों के साथ पत्रकारों से चर्चा की। इस दौरान केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि वह तानाशाह की तरह व्यवहार कर रही है। बंदूक की ताकत से राज करना चाहती है। मगर, हम 10 महीनों से डटे हुए हैं। हमारे 700 साथी शहीद हो गए। इस आंदोलन का अंत केंद्र सरकार ही कर सकती है। टिकैत ने एक सवाल के जवाब में कहा कि केंद्र सरकार के दिमाग में 3 साल से बुखार है। उतर जाएगा। जैसे बंगाल चुनाव में हुआ वही आगे भी होगा। इस दौरान किसान नेता युद्धवीर सिंह, छत्तीसगढ़ से राजाराम त्रिपाठी भी मौजूद रहे।
भाजपा ने ही कहा था यह काला कानून है
राकेश और युद्धवीर ने कहा कि कांग्रेस सरकार 2012 में कृषि कानून बिल लेकर आई थी। जिसका उस वक्त किसानों ने विरोध किया था। प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में भाजपा में एक कमेटी बनी थी, जिसने इसे काला कानून कहा था। आज वही कानून सफेद हो गए। किसान नेताओं ने कहा है कि सरकार इस पर श्वेत पत्र जारी करे।
राज्य की योजनाएं पूरे देश में लागू हो सकती हैं
राकेश टिकैत ने राज्य की कांग्रेस सरकार की नीतियों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि राज्य की कई योजनाएं ऐसी ही जिन्हें पूरे देश में लागू किया जा सकता है। यहां धान की अधिक पैदावार होती है, कई राज्यों में अन्य फसलों की। जिससे एथेनॉल बनाया जा सकता है। मगर, केंद्र मंजूरी नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि राज्य किसानों को बोनस देना चाहते हैं, मगर केंद्र रोड़े अटका रही है।
Published on:
30 Sept 2021 10:03 am

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