
गाजियाबाद: अर्थला झील परिसर में बने 500 मकानों में से 1 दर्जन मकान किए गए ध्वस्त, कार्रवाई देख महिलाएं हुई बेहोश
गाजियाबाद। थाना साहिबाबाद इलाके की झील परिसर में बने 500 मकानों को ध्वस्त करने नगर निगम और जीडीए को भारी विरोध का सामना करना पड़ा। इस दौरान करीब एक दर्जन मकान ध्वस्त किए गए। मौके पर बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात रहा। स्थानीय लोगों द्वारा इस कार्रवाई का जमकर विरोध किया गया। वहीं कुछ महिलाएं बेहोश भी हो गईं, जिन्हें अस्पताल पहुंचाया गया।
बता दें कि अर्थला झील की जमीन पर बने करीब साढ़े पांच सौ मकानों को एनजीटी के द्वारा अवैध घोषित कर उन्हें तत्काल प्रभाव से हटाए जाने के लिए गाजियाबाद के जिला प्रशासन को निर्देशित किया गया था। जिसके आधार पर प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा इस पर कार्रवाई करते हुए ऐसे करीब 500 मकानों को चिन्हित किया गया। जो झील परिसर में ही बने थे ।इन मकानों पर नोटिस चस्पा भी किए गए और कई बार मुनादी कर लोगों को सूचित किया गया कि यह मकान पूरी तरह अवैध हैं और इन्हें एनजीटी के आदेश के अनुसार ध्वस्त किया जाना है। इसलिए सभी लोग इन मकानों को जल्द से जल्द खाली कर दें।
दिन निकलते ही ट्रांस हिंडन पुलिस चौकी पर बड़ी संख्या में फोर्स तैनात होने लगी और दोपहर के बाद पीले पंजे के साथ तमाम अधिकारी मौके पर पहुंचे। जहां पर चिन्हित करीब एक दर्जन मकान और एक धार्मिक स्थल को पहले दिन ध्वस्त कर दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि जितने भी चिन्हित मकान हैं यह सभी ध्वस्त किए जाएंगे। क्योंकि 10 जुलाई को इस पूरे मामले में एनजीटी में अर्थला झील की जमीन से अतिक्रमण हटाकर जिलाधिकारी को रिपोर्ट पेश करनी है।
वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पूरी कॉलोनी करीब 20 साल पुरानी है और पिछले 10 साल इस कॉलोनी में ज्यादा संख्या में मकान बनाए गए हैं। यह कॉलोनी जीटी रोड के एकदम नजदीक है। जब यह मकान बनाए जा रहे थे तो किसी भी प्रशासनिक अधिकारी द्वारा इन्हें बनाने से रोका नहीं गया। आरोप है कि जो भी इस इलाके में नगर निगम और जीडीए के कर्मचारी तैनात थे या स्थानीय पुलिस कर्मी थे, उनके द्वारा भू-माफियाओं से सांठगांठ कर मोटी रिश्वत ली गई। उसके बाद ही यहां यह मकान बनवाए गए हैं। उनके जीवन की सभी जमा पूंजी यही लगी हुई है। अब वह बेघर होने की कगार पर हैं।
लोगों का कहना है कि यदि यहां बनाए गए मकानों को ध्वस्त करना है तो पहले यहां रहने वाले लोगों को घर मुहैया कराया जाएं। उसके बाद ही यहां ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही जब यह कॉलोनी बनाई गई थीं उस दौरान जितने भी जीडीए नगर निगम के कर्मचारी, अधिकारी, स्थानीय पुलिस कर्मी और भू-माफिया थे, उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
इस मामले में एडीएम सिटी शैलेंद्र सिंह व सिटी मजिस्ट्रेट यशवर्धन का कहना है कि एनजीटी के आदेश के बाद अर्थला झील में बने करीब 500 मकान चिन्हित किए गए थे। जिस की कार्रवाई करने से पहले सभी मकानों पर नोटिस भी चस्पा करा दिए थे। साथ ही रोजाना मुनादी कराई जा रही थी कि यहां चिन्हित किए गए मकानों में रहने वाले लोग इन मकानों को खाली कर दें। गुरुवार का दिन आज ध्वस्तीकरण करने के लिए चिन्हित किया गया था। पहले दिन टीम द्वारा करीब एक दर्जन मकानों को ध्वस्त कर दिया गया है। साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा यह भी प्रयास किया जा रहा है कि जो वास्तव में ही बेघर है उन्हें डूडा के जरिए घर दिया जाए। उन्होंने बताया यह कार्रवाई जारी है। जिसके संरक्षण में यह कॉलोनी बसाई गई हैं ऐसे लोगों की भी लिस्ट बनाई जा रही है और उन पर भी सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
Published on:
27 Jun 2019 06:17 pm

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