
गाजियाबाद। फैजाबाद और इलाहाबाद के नाम बदले जाने के बाद सूबे में कई और जिलों के नाम बदलने की मांग तेज होती जा रही है। इस बार गाजियाबाद का नाम बदलने की मांग की गई है। बीजेपी से राज्यसभा सासंद अनिल अग्रवाल ने जिले का नाम महाराजा अग्रसेन नगर रखने की मांग की है। इसके लिए सासंद अनिल अग्रवाल ने सीएम योगी को पत्र भी लिखा है।
नाम बदले जाने पर तर्क देते हुए उन्होंने कहा कि गाजियाबाद की पहचान वैश्य समाज से है यहां सबसे ज्यादा संख्या में वैश्य समाज ही रह रहा है। उनका कहना है कि गाजियाबाद में रहने वाले वैश्य समाज के लोगों की ही यह मांग है कि गाजियाबाद का नाम भी बदलना चाहिए। राज्यसभा सांसद ने कहा कि मुगल शासक गयासुद्दीन ने यह गाजियाबाद बसाया था। लेकिन वह एक शासक था लेकिन गाजियाबाद के विकास में वैश्य समाज का एक बहुत बड़ा योगदान रहा है।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पहले गाजियाबाद एक छोटा सा कस्बा हुआ करता था। लेकिन अब गाजियाबाद की पहचान देश में ही नहीं विदेशों में भी है, क्योंकि गाजियाबाद में एजुकेशन और इंडस्ट्रीज तथा व्यापार की वजह से गाजियाबाद ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है। जिससे सरकार को भी सबसे ज्यादा रिवेन्यू गाजियाबाद से ही जाता है। उन्होंने कहा कि गयासुद्दीन के नाम पर गाजियाबाद गुलामी के दिनों की याद दिलाता है।
हालाकि सासंद अनिल अग्रवाल के इस बयान पर समाजसेवी और दूसरी पार्टी के नेताओं ने आपत्ति जताई है और कहा कि सासंद जी को शहर के विकास पर ध्यान देना चाहुए नाम बदलने पर नहीं। समहवादी पार्टी के नेता अभेषेक गर्ग ने कहा कि सांसद जी ने नाम तो अच्छा सोचा है लेकिन उनको गाजियाबाद के विकास और उन्नति के बारे में सोचना चाहिए। क्योंकि गाजियाबाद का नाम बदलने से पहले यहां के विकास के लिए जाने की सबसे ज्यादा आवश्यकता है। इसलिए सबसे पहले यहां का विकास किया जाना चाहिए।
समाज सेविका वंदना चौधरी ने भी कहा कि नाम बदलने से कुछ नहीं होता है । यह सब एक राजनीति का हिस्सा है यदि यहां का विकास तेज गति में होगा तो निश्चित तौर पर इन्हें राजनीति के चलते शहर का नाम बदलने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी। जनता खुद-ब-खुद इन राजनेताओं का गुणगान करेंगी।
गाजियाबाद के ही रहने वाले एक निवासी राकेश से हमने बात की तो उन्होंने भी यह बताया कि गाजियाबाद का नाम नहीं बदलना चाहिए इससे काफी दिक्कतें आएंगी। इन्होंने अपनी राय में यह भी कहा कि यदि किसी शहर का नाम बदला जाता है तो निश्चित तौर पर उस शहर के केवल एक नाम बदले जाने से काफी रेवेन्यू का नुकसान होता है और जो पहचान आज देशभर में गाजियाबाद की बन चुकी है उसे नाम बदलने के बाद दोबारा से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। इसलिए ज्यादातर लोगों की रायशुमारी में यही सामने आया की बहराल गाजियाबाद का नाम बदलने के बजाय सभी राजनेता यहां के विकास के बारे में सोचे तो ज्यादा बेहतर है।
Updated on:
05 Dec 2018 02:13 pm
Published on:
05 Dec 2018 11:09 am
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