
Dreams of life broken by dowry pain
गोंडा. धानेपुर थाना क्षेत्र के बंदरमरवा गांव में तीन साल पहले हुए नौवीं की छात्रा सोनू के मर्डर के मामले में चल रही सीबीसीआईडी जांच ने अब रफ्तार पकड़ ली है। हाईकोर्ट के आदेश पर मामले की जांच कर रहे अपराध अनुसंधान
विभाग के अपर पुलिस अधीक्षक ने इस मर्डर केस में विवेचक रहे चार उपनिरीक्षकों, एक एचसीपी व तीन सिपाहियों समेत 11 लोगों को बयान दर्ज कराने के लिए तलब किया है। सीबीसीआईडी के एएसपी ने जिले के पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर एक सप्ताह के भीतर बयान के लिए भेजने का अनुरोध किया है।
क्या है पूरा मामला-
धानेपुर थाना क्षेत्र के बंदरमरवा गांव की रहने वाली कक्षा नौवीं की छात्रा सोनू को तीन साल पहले 14 नवंबर के दिन कुछ लोगों ने अगवा कर उसकी हत्या कर दी थी। छह दिन बाद 20 नवंबर को सोनू का शव उसके गांव के बाहर गन्ने के खेतों के बीच एक पेड़ की टहनी में रस्सी के सहारे लटकता पाया गया था। छात्रा की पहचान को छिपाने के लिए हत्यारों ने उसके शव को केमिकल डालकर जला दिया था। इस मामले में धानेपुर पुलिस ने तत्कालीन एसपी के फटकार के बाद छात्रा के पिता बद्री प्रसाद की तहरीर पर अज्ञात लोगों के विरुद्ध उसकी बेटी को अगवा कर उसकी हत्या किए जाने व साक्ष्य छिपाने की रिपोर्ट दर्ज की थी।
हत्या को आत्महत्या बताकर लगाई था फाइनल रिपोर्ट-
परिजनों का आरोप है कि धानेपुर के तत्कालीन एसओ रहे देवेंद्र पांडेय की आरोपियों से मिलीभगत के कारण मामले में लीपापोती होती रही और बाद में विवेचक रामाश्रय राय ने हत्या को आत्महत्या बताकर इसमें फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी। हालांकि हाईकोर्ट ने हत्या को आत्महत्या साबित किए जाने के तर्क पर सवाल खड़ा करते हुए विवेचक को फटकार लगाई थी और फाइनल रिपोर्ट को निरस्त कर दिया था। साथ ही एसपी को इसकी जांच वरिष्ठ पुलिस अफसर से कराने के आदेश दिया था।
पुनः विवेचना में एक महिला सहित 5 लोगों को बनाया गया हत्यारोपी-
हाईकोर्ट के आदेश पर मामले की विवेचना खोड़ारे थाने को सौंपी गई। थाना खोंड़ारे के तत्कालीन एसओ रहे विनोद कुमार यादव ने इस मर्डर केस में बजरंग प्रसाद, उत्तम कुमार, पेशकार, इरशाद व पूनम को आरोपी बनाया और सभी के खिलाफ गिरफ्तारी का मेमो भी जारी किया। और धानेपुर पुलिस ने इसमे तीन आरोपियों को तो गिरफ्तार किया, लेकिन बजरंग व उत्तम को गिरफ्तार करने के बजाय पुलिस उन्हें बचाने में जुटी रही।
पीड़ित के मांग पर सीबीसीआईडी को सौंपी गई जांच-
बद्री प्रसाद ने जब फिर से हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की तो हाईकोर्ट ने मामले की जांच जिला पुलिस से हटाकर सीबीसीआईडी को सौंप दी। अब सीबीसीआईडी ने मामले की जांच तेज कर दी है। घटनास्थल के निरीक्षण के बाद सीबीसीआईडी के गोरखपुर जोन के अपर पुलिस अधीक्षक अखिलेश्वर पांडेय ने केस की विवेचना कर चुके दरोगा रामाश्रय राय, विनोद कुमार सरोज, विनोद कुमार यादव व पवन कुमार सिंह हेड कांस्टेबल वीरेंद्र मिश्र, कांस्टेबल मोहर्रिर उमेश कुमार, कांस्टेबल मोहम्मद रफी व अखिलेश्वर शर्मा समेत 11 लोगों को बयान दर्ज कराने के लिए एक सप्ताह के भीतर तलब किया है।
Published on:
06 Dec 2018 08:12 pm

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