
आईजी अमित पाठक फोटो सोर्स विभाग
देवीपाटन परिक्षेत्र में वाहन दुर्घटना से जुड़े बीमा मामलों में बड़ा घोटाला सामने आया है। जाँच में खुलासा हुआ है कि आर्थिक लाभ के लिए दुर्घटनाओं में वास्तविक वाहन और चालक की जगह दूसरे बीमाकृत वाहन व वैध लाइसेंसधारी चालक दिखाए गए। ऐसे तेरह मामलों में 16 पुलिसकर्मी दोषी पाए गए हैं।
बीमा कंपनी के अधिकारी राजेन्द्र प्रताप सिंह द्वारा दिए गए शिकायती प्रार्थना-पत्र के आधार पर गोंडा, बहराइच और श्रावस्ती में वाहन दुर्घटनाओं से जुड़े मामलों की जाँच कराई गई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कुछ पुलिसकर्मी बीमा कंपनियों से क्षतिपूर्ति दिलाने के नाम पर वास्तविक दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को बदलकर दूसरे बीमाकृत वाहन दर्शा रहे हैं। जिससे बीमा कंपनियों को आर्थिक नुकसान हो रहा है।
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस महानिरीक्षक, देवीपाटन परिक्षेत्र के स्तर से विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया। एसआईटी की जांच में गोंडा जिले में 2, बहराइच में 9 और श्रावस्ती में 2 मामलों में अनियमितता पाई गई। कुल 13 मामले में पुलिस विवेचकों की संलिप्तता सामने आई। जांच में यह भी पाया गया कि जिन दुर्घटनाओं में वाहन बीमित नहीं थे। या चालकों के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। वहां वास्तविक वाहन और चालक की जगह दूसरे बीमाकृत वाहन व वैध लाइसेंसधारी चालक को दर्शाया गया। इससे मृतकों के परिजनों को बीमा कंपनी से क्षतिपूर्ति दिलाने का प्रयास किया गया। जो भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है। एसआईटी रिपोर्ट के आधार पर एक निरीक्षक और 12 उपनिरीक्षकों को निलंबित करते हुए उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। वहीं, शेष 3 उपनिरीक्षकों के विरुद्ध निलंबन और विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है। पुलिस विभाग ने साफ किया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
आईजी अमित पाठक ने बताया कि देवीपाटन परिक्षेत्र में हमें शिकायत मिली कि एक्सीडेंट के उन केस में जिसमें किसी व्यक्ति की मृत्यु हुई है। जो विवेचक है। उनके द्वारा अनियमितता करते हुए जिन गाड़ियों से एक्सीडेंट हुआ। उन्हें परिवर्तित किया गया। तथा जिन चालकों ने एक्सीडेंट किया। उनका नाम बदलकर दूसरे चालक को प्रकाश में लाया गया। ऐसा इसलिए किया गया कि जो इंश्योरेंस की कंपनी थी। उससे लाभ दिलाया जा सके। ऐसे केस जिनमें वाहन बीमित नहीं होता है। तथा चालक के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं होता है। तो इसकी क्षतिपूर्ति संबंधित व्यक्ति से किए जाने का प्रावधान है। किंतु कई विवेचनाओं में इनके द्वारा फर्जी तरीके से ऐसे वाहनों को प्रकाश में लाया गया। जिनके द्वारा दुर्घटना नहीं की गई थी। ना ही उस समय प्रकाश में आए चालक मौजूद थे। देवीपाटन परिक्षेत्र के अलग-अलग जनपदों में जांच कराई गई। तो ऐसे 13 प्रकरण निकलकर सामने आए हैं। जिसमें 16 विवेचकों द्वारा यह अनियमिताएं की गई हैं। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर एक निरीक्षक और 12 उपनिरीक्षक को सस्पेंड कर दिया गया है। उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। तीन अन्य उप निरीक्षक जिनका स्थानांतरण हो चुका है। इसके लिए संबंधित जिले को को सूचना भेजकर उन्हें निलंबित किए जाने तथा विभागीय जांच के लिए प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया है। इन सभी मामलों में सही विवेचना करके सही वाहन और वाहन चालकों को उत्तरदाई बनाने के लिए अग्रिम विवेचना के आदेश दिए गए हैं।
बहराइच जनपद के हरदी थाने के उपनिरीक्षक अरुण कुमार पांडेय, थाना रामगांव के उपनिरीक्षक संजीव कुमार, थाना नवाबगंज के अशोक कुमार, थाना नानपारा के उपनिरीक्षक अशोक कुमार एवं विवेक यादव, थाना मटेरा के उपनिरीक्षक तेज नरायण यादव व राकेश कुमार, थाना नानपारा के उपनिरीक्षक राजेश्वर सिंह, थाना रामगांव के रुपनरायन गौड़, थाना मोतीपुर के उपनिरीक्षक विजय यादव व दिवाकर तिवारी, थाना बौंडी के उपनिरीक्षक मेहताब आलम, गोंडा में खरगूपुर के उपनिरीक्षक शेषनाथ पांडेय, इटियाथोक के शशांक मौर्य, श्रावस्ती जनपद के इकौना थाने के उपनिरीक्षक शैलेश कुमार व प्रेमचंद तथा भिनगा थाने के निरीक्षक योगेश सिंह व उपनिरीक्षक गुरुसेन सिंह के खिलाफ कार्रवाई हुई है।
Updated on:
30 Jan 2026 07:56 pm
Published on:
30 Jan 2026 05:54 pm

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