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29 प्रजातियों के पेड़ काटना उत्तर प्रदेश में प्रतिबंधित, नहीं काट सकेंगे यह पेड़

प्रदेश सरकार में 6 प्रतिबंधित श्रेणी से बढ़ाकर 29 की

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अब उत्तर प्रदेश में 29 प्रजातियों के पेड़ काटने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। पहले केवल छह प्रजाति के पेड़ों के काटने पर प्रतिबंध था। केवल विशेष परिस्थिति में इन पेड़ों को काटा जा सकता है। पहले एक पेड़ काटने पर दो पौधा लगाने व उसके संरक्षण की अनिवार्यता थी, अब एक पेड़ काटने के बदले दस पौधा लगाना होगा व उसका संरक्षण करना होगा। नए नियम के बाद किसान अब अपनी निजी जमीन पर भी इन 29 प्रजातियों को लगाने से हिचकेगा।

पहले यह था नियम

25 व 31 अक्टूबर 2017 को अधिसूचना जारी कर सरकार ने 62 जिलों में आम, नीम, साल, खैर और महुआ और 13 जिलों में सागौन को छोड़ कर निजी जमीन पर लगे बाकी वृक्षों को अनुमति के दायरे से बाहर कर दिया था। इन छह प्रजातियों के वृक्षों को काटने के लिए वन विभाग से अनुमति जरूरी थी। इसकी अनुमति तभी दी जा सकती थी जब ये वृक्ष सूख गए हों, किसी व्यक्ति या संपत्ति के लिए खतरा पैदा हो गया हो या विकास योजनाओं के लिए काटना जरूरी हो। लेकिन कुछ पर्यावरण प्रेमी इसके खिलाफ हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने रोक लगा दी थी।

अब हुआ नियम में बदलाव

10 दिसंबर को कैबिनेट में यूपी वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1976 के प्रावधानों में बदलाव करते हुए प्रतिबंधित श्रेणी के वृक्षों की संख्या बढ़ा कर 29 कर दी। प्रत्येक वृक्ष के काटने पर 2 पौधे लगाने और उनके संरक्षण का प्रस्ताव था, लेकिन सीएम योगी आदित्यनाथ ने पौधरोपण की संख्या बढ़ा कर प्रति वृक्ष 10 कर दी। अगर काटने वाले के पास इतने पौधे लगाने के लिए जमीन नहीं है तो वह वन विभाग को इसके लिए धनराशि जमा करेगा। वन विभाग इस रकम से पौधे लगा कर उनका संरक्षण करेगा।

अब ये वृक्ष बिना अनुमति नहीं कटेंगे

आम (देशी, तुकमी, कलमी), नीम, साल, महुआ, बीजा साल, पीपल, बरगद, गूलर, पाकड़, अर्जुन, पलाश, बेल, चिरौंजी, खिरनी, कैथा, इमली, जामुन, असना, कुसुम, रीठा, भिलावा, तून, सलई, हल्दू, बाकली/करधई, धौ, खैर, शीशम और सागौन।

दिसंबर 2025 तक लागू रहेगा प्रतिबंध

यह प्रतिबंध 31 दिसंबर 2025 तक लागू रहेगा। लेकिन शर्तों के साथ काटने की अनुमति मिलेगी। मसलन वृक्ष सूख गया हो या सूख रहा हो, या व्यक्ति या सम्पत्ति के लिए खतरा पैदा कर रहा हो, सरकार द्वारा स्वीकृति विकास कार्य में बाधा उत्पन्न कर रहा हो, या फिर उसका सम्पूर्ण विकास हो गया हो। अथवा उसकी फल धारण करने की क्षमता खत्म हो गई हो।

ऑनलाइन आवेदन से मिलेगी अनुमति

इन वृक्षों को काटने के लिए वन विभाग से कुछ शर्तों के आधार पर अनुमति लेनी पड़ेगी। अनुमति के लिए आवेदन ऑनलाइन किए जा सकेंगे। इस बाबत डीएफओ गोरखपुर ने बताया कि 7 जनवरी को गजट नोटिफिकेशन जारी हुआ था इसके मुताबिक 29 प्रजातियों के पेड़ों को प्रतिबंधित श्रेणी में रखा गया है। जिले के सभी रेंजरों को निर्देशित किया गया है कि किसी भी दशा में इस प्रजाति के वृक्ष नहीं कट सकते हैं। इसके लिए अनुमति लेनी पड़ेगी।