
गोरखपुर चिड़ियाघर में उस समय हड़कंप मच गया जब एक हिंसक बाघ की बाड़े में मौत हो गई। बता दें कि यह बाघ आदमखोर हो चुका था और इसे पीलीभीती टाइगर रिजर्व से काबू करके गोरखपुर लाकर बाड़े में रखा था।यह बाघ चौदह लोगों को शिकार बना कर आदमखोर हो चुका था, अधिकारियों ने 14 दिन तक इसे पकड़ने का अभियान चलाया। 23 सितंबर 2024 को सुबह करीब 4:50 बजे माला रेंज की भैरो बीट में उसे ट्रंक्युलाइज कर दिया।सीएम योगी ने 20 जनवरी को इसका केसरी नामकरण करते हुए बाड़े में छोड़ा था।
गोरखपुर में केसरी की हुई मौत के बाद हुए पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चला है कि "केसरी" के दिमाग में सूजन और पानी भर गया था। मामले को गंभीरता से लेते हुए विसरा को बरेली भेजा गया है। इसके मौत की जांच टीम भी गठित कर दी गई हैं। जानकारी के मुताबिक शनिवार को बाघ बहुत ही उग्र था, बार बार वह बंद पिजड़े से निकलने को कोशिश में खुद को घायल करता गया। बाघ लगभग तीन क्विंटल वजनी था।रविवार को सुबह इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बाद इंडियन वेटनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (IVRI) बरेली और लखनऊ चिड़ियाघर से पशु चिकित्सक आए। उन्होंने बाघ का पोस्टमार्टम किया। जू अथारिटी ने जांच के लिए दो टीमें बनाई हैं। ये टीमें गोरखपुर जाकर मामले की जांच करेंगी। चर्चा में यह भी आ रहा है कि केशरी के बगल में एक सफेद बाघिन गीता का भी क्रॉल था। शुरू में तो गीता की केशरी से नजदीकियां बढ़ी लेकिन इधर कुछ दिनों से गीता अपने दूसरी तरफ क्रॉल में रह रहे अमर नाम के बाघ से जुड़ने लगी थी। इस कारण भी केशरी तनाव में रहने लगा था।
Updated on:
31 Mar 2025 09:30 pm
Published on:
31 Mar 2025 09:26 pm
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