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गोरखपुर जेल का जर्मन कैदी लौटेगा जर्मनी, जानिये नेपाल बाॅर्डर से क्यों किया गया था गिरफ्तार

इंडो जर्मन प्रत्यार्पण संधि के तहत 12 अगस्त को दिल्ली एयरपोर्ट पर जर्मनी पुलिस के हवाले किया जाएगा जर्मन कैदी ब्रांड फ्रेंडमैन। साल 2014 में इंडो नेपाल बाॅर्डर से हुआ था गिरफ्तार। कोट ने सुनार्इ थी 10 साल की सजा।

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पत्रिका न्यूज नेटवर्क, गोरखपुर. साल 2014 से नेपाल बॉर्डर से गिरफ्तारी के बाद 10 साल की सजा काट रहा जर्मन नागरिक बैरेंड मैनफ्रेंड अब बाकी की सजा अपने देश में काटेगा। उसे प्रत्यार्पण संधि के तहत जर्मनी भेजे जाने का रास्ता साफ हो गया है। 12 अगस्त को उसे दिल्ली के एयरपोर्ट पर जर्मनी की पुलिस को सौंप दिया जाएगा।


जर्मनी के सजसेन का रहने वाला बैरेंड मैनफ्रेंड को भारत नेपाल सीमा पर साल 2014 में गिरफ्तार किया गया था। उसके पास से नशे का सामान बरामद हुआ था। उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर कोर्ट में पेश किया गया और 20 दिसंबर 2018 को अदालत ने बैरेंड मैन फ्रेंड को 10 साल की कठोर सजा और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।


मैनफ्रेंड की गिरफ्तारी के बाद उसकी पत्नी जूलिया कैफर लगातार इस प्रयास में जुटी थी कि किसी तरह पति को भारत की जेल से छुड़ाकर अपने वतन ले जा सके। इसके लिये वह बार-बार जर्मनी से इंडिया आती रही। उसकी कोशिशों से कोर्ट ने बैरेंड मैनफ्रेंड की जमानत भी साल 2017 में मंजूर किया था। इसके लिये 5-5 लाख के दो जमानतदार प्रस्तुत करने थे। इसकी प्रक्रियाएं भी पूरी हो गई हैं।


गोरखपुर के जेलर प्रेम सागर शुक्ला के अनुसार बैरेंड फ्रेंडमैन को 10 साल की सजा हुई, जिसमें से छह साल से अधिक की सजा काट चुका है। प्रत्यार्पण संधि के तहत उसे उसके देश भेजे जाने की कार्रवाई की जा रही है। वह बाकी की सजा अपने देश जर्मनी की जेल में काटेगा। 12 अगस्त को उसे जर्मन पुलिस के हवाले कर दिया जाएगा।