केन्द्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो के भीलवाड़ा संभाग में मौसम की मार एवं रोग के प्रकोप से अफीम काश्तकारों की उम्मीद को तगड़ा झटका है।
बेगूं तहसील क्षेत्र में नब्बे फीसदी से अधिक अफीम की फसल तबाह हो गई। कही अफीम का पट्टा नहीं कट जाए, इस चिंता से घुल रहे काश्तकार फसल की हकवाने के लिए जिला अफीम कार्यालय में पहुंच रहे हैं। अब तक दो हजार से अधिक काश्तकार हकाई के लिए आवेदन कर चुके हैं।
गत वर्ष फरवरी में हुई बारिश व ओलावृष्टि से फसल खराब होने से भीलवाड़ा व चित्तौडग़ढ़ जिले के बड़ी संख्या में काश्तकारों को पट्टे गंवाने पड़े थे। काफी मशक्कत के बाद केन्द्र सरकार ने इनको राहत की घोषणा की।
इस राहत से काश्तकार उबर ही पाए कि जनवरी के अंतिम सप्ताह व फरवरी के पहले पखवाड़े में बढ़ी तपन अफीम के पौधे झेल नहीं पाए। चीरे लगने से पूर्व ही पौधे झुलस गए। काश्तकार इस स्थिति को संभल पाते, इससे पूर्व ही रोग ने फसल पर कहर बरपा दिया। डोडे तक को कीट लील गए।
2242 में से 2005 ने किया आवेदन
बेगूं तहसील क्षेत्र में सर्वाधिक खराबा हुआ है। केन्द्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो ने बेगूं क्षेत्र के 113 गांवों के 2242 काश्तकारों को 643.350 हैक्टेयर के पट्टे जारी किए थे। फसल की हकवाई व नुकसान की भरपाई के प्रार्थना पत्र लेकर बेगूं क्षेत्र से काश्तकार भीलवाड़ा स्थित केन्द्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो कार्यालय में पहुंच रहे हैं।
2242 में से 2005 काश्तकार फसल की हकाई के लिए आवेदन पेश कर चुके हैं। इसी प्रकार रावतभाटा तहसील के 23 गांव के 258 काश्तकारों में से 200 को भारी नुकसान झेलना पड़ा है।
गंगरार व राशमी में भी पचास फीसदी फसल को क्षति पहुंची है। भीलवाड़ा जिले के माण्डलगढ़ व बिजौलियां क्षेत्र में आंशिक नुकसान पहुंचा है।