मूलत: देवरिया शहर के गरूढ़पार, न्यू कॉलोनी के रहने वाले राज कुमार गुप्ता की दो बेटियां व एक बेटे में रचना सबसे छोटी हैं। बचपन से ही पढ़ाई में होनहार रचना ने देवरिया स्थित मॉडर्न सिटी मांटेसरी स्कूल से 12 वीं तक की तालीम हासिल करने के बाद गोरखपुर विश्वविद्यालय से बीएससी गणित में 68 फीसदी और एमएससी गणित में 93.05 फीसदी अंक प्राप्त किया है।
Gorakhpur News : इंसान अगर अपना लक्ष्य निर्धारण कर विपरीत परिस्थितियों में भी अपने कर्म पर दृढ़ता पूर्ण तरीके से जुटा रहे तो निश्चित ही सफलता कदम चूमती है।इसे साबित करके दिखाया है देवरिया की बेटी रचना गुप्ता ने, जिनके पिता ठेले पर मिठाई बेचते हैं।
पिता की कमजोर आर्थिक स्थिति का घर पर रहा प्रभाव
देवरिया जिले की रचना गुप्ता हर रोज लगभग 60 किलोमीटर का लंबा रास्ता तय करके गोरखपुर विश्वविद्यालय पढ़ने आती रहीं। लेकिन, विपरीत परिस्थिति के आगे हारने के बजाय डटकर पढ़ाई में जूझीं और कड़ी मेहनत करके दीक्षांत समारोह में सर्वाधिक नौ गोल्ड मेडल हासिल किए। अपने पिता और देवरिया का मान बढ़ाने के साथ एक नजीर भी पेश की।
IAS बनने का है सपना
रचना का सपना आईएएस बनना है। मूलत: देवरिया शहर के गरूढ़पार, न्यू कॉलोनी के रहने वाले राज कुमार गुप्ता की दो बेटियां व एक बेटे में रचना सबसे छोटी हैं। बचपन से ही पढ़ाई में होनहार रचना ने देवरिया स्थित मॉडर्न सिटी मांटेसरी स्कूल से 12 वीं तक की तालीम हासिल करने के बाद गोरखपुर विश्वविद्यालय से बीएससी गणित में 68 फीसदी और एमएससी गणित में 93.05 फीसदी अंक प्राप्त किया है।
नौ गोल्ड मेडल हासिल कर बढ़ाई घर का मान
रचना की इस उपलब्धि पर दो विश्वविद्यालय गोल्ड मेडल और सात स्मृति गोल्ड मेडल दिए गए हैं। रचना अब सिविल सर्विसेज में जाना चाहती हैं। इसके लिए तैयारी भी शुरू कर दी है।दीक्षांत समारोह में जब रचना को गोल्ड मेडल दिया जा रहा था उनके बड़े भाई विजय गुप्ता भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि बहन की इस उपलब्धि पर हम सभी को गर्व है। परिवार में हर्ष का माहौल है। हम लोग रचना के हर सपना को पूरा कराने में जी-जान लगा देंगे।