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मां की मौत के बाद सौतेली मां ने घर से निकाला, ननिहाल में भी नहीं मिला आसरा, उसने निकाला दर्जनों बच्चियों को नारकीय जीवन से

  देवरिया बालिका गृह कांड के बहादुर बिटिया की कहानी, आपकी भी भर आएंगी आंखें

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deoria sex racket

देवरिया नारी संरक्षण केन्द्र कांड

देवरिया के बालिका गृह में दर्जनों बच्चियों को नर्क की जिंदगी से छुटकारा दिलाने वाली दस साल की छोटी बच्ची की बहादुरी की हर कोई सलाम कर रहा। बेहद बुरे दौर से गुजर रही इस बच्ची ने हिम्मत नहीं हारी, खुद को मुक्त तो कराया ही दर्जनों लड़कियों को नारकीय जीवन से बचाया।
बिहार प्रान्त के बेतिया की रहने वाली दस साल की बच्ची की कहानी भी बहुत मार्मिक है। सेक्स रैकेट का पर्दाफाश कराने वाली इस बच्ची की माँ की तीन साल पहले मौत हो गई। सात साल की उम्र में इस बच्ची पर दुःखों का पहाड़ टूट पड़ा। खेलने की उम्र में इस बच्ची पर प्रताड़ना का गाज गिरने लगा। पिता ने दूसरी शादी कर ली थी। सौतेली माँ आये दिन मारती-पीटती थी। एक दिन उसे घर से निकाल दिया गया। बिटिया को लगा ननिहाल में उसकी मदद मिल जाएगी। ननिहाल में भी उसको जगह नहीं मिली। बेचारी को लोगों ने मदद को पुलिस के पास भेज दिया। पुलिस ने इस बच्ची को देवरिया के बालिका गृह में भेज दिया। यहाँ बच्ची पहुंच तो गई लेकिन उसकी दिक्कतें कम नहीं हुई। यहाँ भी उसको प्रताड़ित किया जाता। काम करवाया जाता, मारपीट किया जाता। रविवार को इस प्रताड़ना से तंग बच्ची ने किसी तरह भाग कर अपनी आपबीती पुलिस को बताई और अपने साथ दर्जनों जिन्दगियों को तबाही से बच लिया।

यह है पूरा मामला, आपको भी शर्म आएगी जानकर

बिहार के मुजफ्फरनगर के बाद अब यूपी के देवरिया में एक बलिकागृह में पुलिस ने एक बड़े सेक्स रैकेट का खुलासा किया है। किसी तरह दरिंदों की चंगुल से छूट एक बच्ची थाने पहुंची तो मामला सामने आया। इसके बाद हुई कार्रवाई में 24 बच्चियों व महिलाओं को वहाँ से छुड़ाया गया। जबकि 18 बच्चियां अभी भी लापता हैं। पुलिस ने देर रात कार्रवाई करते हुए। बालिका गृह संचालिका गिरिजा त्रिपाठी, उनके पति सहित तीन को गिरफ्तार कर लिया गया है।
पुलिस के अनुसार मान्यता रद होने के बाद बालिका गृह का संचालन हो रहा था।
मां विंध्यवासिनी महिला शिक्षण प्रशिक्षण व समाज सेवा संस्थान द्वारा देवरिया में बाल गृह बालिका, बाल गृह शिशु सहित कई गतिविधियां संचालित की जा रही थी। लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने इस संस्था की मान्यता रद कर दी थी। इसके बावजूद संस्थान द्वारा बालिका गृह संचालित किया जा रहा था।
रविवार को इस संस्था से भाग कर बेतिया बिहार की रहने वाली एक बच्ची प्रताड़ना से तंग आकर किसी तरह भाग कर महिला थाने पहुंची। उसने अपनी आपबीती पुलिस को सुनाई। महिला थाने से एसपी को जानकारी दी गई। एसपी ने तत्काल कार्रवाई को निर्देश दिया। देर रात में ही फोर्स के साथ बालिका गृह में छापेमारी हुई।
इस छापेमारी में 24 बच्चियों व महिलाओं को मुक्त कराया गया। एसपी रोहित पी कनय ने बताया कि बच्चियों की उम्र 15 से 18 साल है। इन्होंने बातचीत में बताया कि इनसे गलत कृत्य कराया जा रहा है। रिकॉर्ड के अनुसार अभी भी 18 बच्चियां गायब हैं। उन्होंने बताया कि इस गृह की अधिक्षिका कंचनलता, संचालिका गिरिजा त्रिपाठी, मोहन किशोर त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिया गया है।
बच्चियों ने बताया कि दीदी लोगों को लेने के लिए रात में कार आती थी। जब वह लोग वापस आती थी बहुत रोते हुए आती, पूछने पर कुछ नहीं कहती। बच्चियों ने बताया कि उनसे बहुत काम लिया जाता था, पोछा भी लगाया जाता था। नहीं करने पर मारा पीटा जाता था।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि जांच कमेटी गठित कर दी गई है।