
गोरखपुर। उपचुनाव गोरखपुर में 29 साल के बाद भगवा किले के ढहने की चर्चा के साथ ही दो अधिकारी काफी चर्चित हो रहे। एक जिनको बीजेपी के पक्ष में गड़बड़ी किए जाने संबंधी पोस्ट सोशल मीडिया पर ट्रेेंड कर रहा तो दूसरा उस महिला अधिकारी की जिसने आयोग के निर्देश पर तत्काल मौके पर पहुंच परिणाम का ऐलान होने तक नजर रखे रहीं।
सोशल मीडिया पर यहां तक कहा जा रहा कि अगर यह महिला अधिकारी नहीं होती तो बीजेपी ने तो जीत की सारी तैयारी कर ली थी। ऐन वक्त पर पहुंच कर इन्होंने सारा खेल बिगाड़ दिया।
बता दें कि गोरखपुर उपचुनाव में निर्वाचन आयोग ने महिला आईएएस डाॅ.माधवी खोड़े चावरे को नियुक्त किया था। इनकी ही देखरेख में चुनाव हुए।
काउंटिंग के दिन शुरूआत के कुछ घंटों तक जिला निर्वाचन अधिकारी/ डीएम राजीव रौतेला ने बेहद धीमी गति से गणना की बात कहते रहे। आलम यह करीब नौ राउंड तक मतों की गिनती होने के बाद पहला अपडेट देने में इंतजार करने की बात डीएम कहते रहे। जबकि उधर, फूलपुर में इतनी ही देर में पांच राउंड से ज्यादा के अपडेट सार्वजनिक कर दिए गए। अपडेट जारी करने में हीलाहवाली से मीडिया से लगायत सभी काउंटिंग में गड़बड़ी की आशंका जताने लगे। देखते ही देखते पूरा हंगामा खड़ा हो गया। सभी डीएम राजीव कुमार रौतेला को देरी करने का दोशी मानने लगे।
मामला चुनाव आयोग तक पहुंच गया। तत्काल यहां की प्रेक्षक डाॅ.माधवी भी मौके पर पहुंची। बताया जा रहा कि वहां पहुंचने पर किसी बात को लेकर डीएम व प्रेक्षक में तल्खी भी देखने को मिली। उधर, निर्वाचन आयोग ने देरी किए जाने पर जवाब मांग लिया। इसके बाद महिला आईएएस/प्रेक्षक मौके पर परिणाम के ऐलान तक जमी रहीं। वह अपनी मौजूदगी में डीएम से एक-एक राउंड का रिपोर्ट जारी भी कराती रहीं।
प्रेक्षक के इस काम की सोशल मीडिया से लगायत आमजन में भी खबू चर्चा है। कहा तो यहांतक जा रहा कि अगर वह न होती तो शायद सपा गठबंधन की जीत तक नहीं हुई होती।
Published on:
17 Mar 2018 12:12 pm

बड़ी खबरें
View Allगोरखपुर
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
