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पूर्वांचल के कद्दावर नेता सपा से हुए बागी, निर्दल लड़ेंगे चुनाव, ‘एम-वाई’ समीकरण साध निर्दलीय ही बने थे सांसद

सपा में बगावत

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samajwadi party rebellion Baleshwar Yadav with Akhilesh

पूर्वांचल के कद्दावर नेता हुए सपा से बागी, 'एम-वाई' समीकरण साध निर्दलीय ही बने थे सांसद

समाजवादी पार्टी की लिस्ट आते ही सपा के कद्दावर नेता पूर्व सांसद बालेश्वर यादव ने बगावत का झंडा बुलंद कर दिया है। पूर्व सांसद ने कुशीनगर से निर्दल चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। सपा मुखिया पर आश्वासन देकर टिकट काटने का आरोप लगाया है। पूर्व सांसद बालेश्वर यादव 2005 में सपा से बगावत कर निर्दल चुनाव जीत चुके हैं।
पूर्व सांसद बालेश्वर यादव की गिनती समाजवादी पार्टी के बड़े नेताओं में होती है। 1984 में पहली बार लोकदल से विधायक बनने वाले बालेश्वर यादव जनता लहर में 1989 में संसदीय चुनाव पडरौना से लड़े। जनता दल से चुनाव लड़ने वाले बालेश्वर के सिर इस बार भी जीत का सेहरा बंधा और वह सांसद बने। 1993 में वह पडरौना विधानसभा से दुबारा विधायक बने। 2004 में समाजवादी पार्टी ने इनको टिकट न देकर कुशीनगर के जिलाध्यक्ष रहे रामअवध यादव को चुनाव लड़ाया। इस बार बालेश्वर यादव ने बगावत कर चुनाव लड़ने का ऐलान किया। निर्दल ही चुनाव मैदान में आए बालेश्वर यादव को नेशनल लोकतांत्रिक पार्टी ने समर्थन दिया। पूर्व सांसद बालेश्वर यादव का मुसलमान व यादवों का समीकरण काम आया, लोगों ने निर्दलीय चुनाव मैदान में आए पूर्व सांसद को जबर्दस्त समर्थन दिया और वह चुनाव जीत गए।
चुनाव जीतने के बाद वह कांग्रेस में चले गए। फिर देवरिया से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में संसदीय चुनाव लड़े लेकिन सफल नहीं हुए। 2009 के संसदीय चुनाव के कुछ ही समय बाद समाजवादी पार्टी में वापसी कर ली। 2014 में समाजवादी पार्टी ने पूर्व सांसद को देवरिया संसदीय क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया लेकिन वह जीत नहीं सके। इस बार 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए वह कुशीनगर लोकसभा क्षेत्र से तैयारी कर रहे थे।
मुलायम सिंह यादव की सरकार में मिनी मुख्यमंत्री के रूप में जाने जाने वाले बालेश्वर यादव जनता में पकड़ रखने वाले नेताओं में होती है। यादव व मुसलमान बिरादरी में मजबूत पकड़ रखने वाले पूर्व सांसद पिछले काफी दिनों से कुशीनगर लोकसभा सीट पर महागठबंधन की टिकट के लिए आश्वस्त थे। गुरुवार को सपा ने प्रत्याशियों की सूची जारी की तो उसमें कुशीनगर से दूसरे प्रत्याशी को उतारे जाने से वह बगावती तेवर में आ गए।